कुंडली के द्वितीय भाव में सूर्य का प्रभाव

कुंडली के द्वितीय भाव में सूर्य का प्रभाव

1) सूर्य के द्वितीय भाव में प्रभाव जानने के पहले आप एक बार सूर्य और द्वितीय भाव के कार्यक्रम के बारे में जानकारी जरूर प्राप्त कर ले ।


2)सूर्य द्वितीय भाव में हमारी वाणी हमारे चेहरे और हमारे संचित धन और परिवार या फैमिली  पर प्रभाव डालता है ।


3)सूर्य एक नैसर्गिक क्रूर ग्रह है और ज्योतिष के शास्त्रों के अनुसार सूर्य में सूर्य द्वितीय भाव में अच्छा नहीं माना जाता है । यह हमारी वाणी पर नकारात्मक प्रभाव डालता है । सूर्य देव ग्रहों के राजा हैं अतः जातक के स्वर ऑर्डर देने लायक या कड़क आवाज वाला या कठोर वाणी वाला या जिस की वाणी में आदेश जैसा स्वर हो जो कि सुनने में अच्छा ना लगे ऐसी वाणी वाला व्यक्ति हो सकता है । जातक बेशर्म और कठोर वचन बोलने वाला हो सकता है । वह अपनी वाणी से अपना घमंड और ईगो को प्रदर्शित करेगा । इसके अलावा अगर पॉजिटिव रूप से देखा जाए तो जातक की वाणी में नैसर्गिक रूप से नेतृत्व की क्षमता होगी । अगर सूर्य द्वितीय भाव में पीड़ित हो तो जातक की वाणी में हकलाहट या थरथराहट हो सकता है।


4)द्वितीय भाव हमारे चेहरे का कारक हाउस है अतः द्वितीय भाव में सूर्य के कारण जातक का चेहरा लालिमा लिए हुए हो सकता है। सूर्य द्वितीय भाव में जातक को इससे संबंधित किसी समस्या का कारण हो सकता है जैसे कि कील मुंहासे इत्यादि । सूर्य द्वितीय भाव में चेहरे पर नैसर्गिक रूप से चमक और आकर्षण देगा। अगर सूर्य द्वितीय भाव में पीड़ित हो तब जातक को आंखों से संबंधित समस्या का सामना करना पड़ सकता है।


5)जातक को अपने नौकर चाकर और वाहन का सुख होगा ऐसा बहुत सारे ज्योतिष के ग्रंथों में बताया गया है । सूर्य ग्रहों के राजा हैं अतः अगर सूर्य द्वितीय भाव में उत्तम स्थिति में हो तो जातक को सरकार या एडमिनिस्ट्रेशन, प्रशासन या उनके समकक्ष राजकीय व्यक्तियों से लाभ प्राप्त हो सकता है । अगर सूर्य द्वितीय भाव में अनुकूल परिस्थिति में ना हो तो जातक को सरकारी पक्ष से धन का नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। सूर्य के द्वितीय भाव में होने के कारण जातक अपनी खुद की मेहनत और क्षमता के दम पर धन अर्जित करता है। द्वितीय भाव में सूर्य आसानी से धन उपलब्ध नहीं करवाता है।


6)द्वितीय भाव में सूर्य पारिवारिक जीवन के लिए अच्छा नहीं माना गया है ।जातक के परिवार में आपस में इगो प्रॉब्लम के कारण समस्याएं रहेगी। यदि सूर्य द्वितीय भाव में उत्तम स्थिति में हो तो जातक को जातक की फैमिली प्रसिद्ध और सम्मानित होगी।


7)सूर्य के द्वितीय भाव में होने के कारण जातक अपनी पैतृक संपत्ति को प्राप्त करेगा । उनके पिताजी एक पावरफुल और प्रसिद्ध व्यक्ति होंगे।


8)द्वितीय भाव में सूर्य के कारण जातक एक साथ बहुत सारे कार्यों को करने में सक्षम होगा और कार्यरत रहेगा। साधारण भाषा में हम बोल सकते हैं जातक एक साथ मल्टी टास्किंग एबिलिटी वाला होगा जिसके कारण जातक मानसिक रूप से परेशान रहेगा और जातक की वाणी पर नकारात्मक प्रभाव डालेगा।


9)सूर्य के द्वितीय भाव में होने के कारण जातक में नैसर्गिक रूप से किसी भी मंत्र को सिद्ध करने की क्षमता होगी। पर यह और भी बहुत सारी परिस्थितियों पर और ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करता है । वास्तव में सूर्य गूढ़ रहस्य को जानने वाला या गूढ़ रहस्यों का ज्ञान देने वाला ग्रह है इसलिए जातक द्वितीय भाव में सूर्य के कारण मंत्र और ज्योतिष के ज्ञान में परिपूर्ण हो सकता है।


10)द्वितीय भाव में सूर्य के कारण जातक शेयय बाजार से धन बना सकता है या अर्जित कर सकता है। 

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