कुंडली के दशम भाव में शनि का प्रभाव

कुंडली के दशम भाव में शनि का प्रभाव

1)कुंडली के दशम भाव में शनि का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम दशम भाव और शनि के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे।

2) शनि काल पुरुष की कुंडली में दशम एवं एकादश भाव का स्वामी है। अतः शनि को कर्म कारक ग्रह माना गया है। शनि की स्थिति दशम भाव में शुभ मानी गई है। साथ ही दशम भाव को एक उपचय हाउस भी माना जाता है। अतः दशम भाव में स्थित शनि अपनी नैसर्गिक कारक में वृद्धि करता है। अतः जातक के प्रोफेशनल लाइफ के लिए उत्तम है।

3) दशम भाव को कर्म स्थान माना जाता है। अतः शनि दशम भाव में स्थित होकर जातक को अपने प्रोफेशनल लाइफ में संघर्ष भी देता है। ऐसा माना जाता है, जीवन के आरंभिक चरण में जातक अपने प्रोफेशनल लाइफ में संघर्ष करता है। लेकिन उसके बाद जातक को अपने प्रोफेशनल लाइफ में बहुत ही उत्तम सफलता प्राप्त होती है। दशम भाव में स्थित शनि जातक के व्यापारिक जीवन में उतार-चढ़ाव देता है। ऐसी मान्यता है कि दशम भाव में स्थिति के कारण जातक अपने जीवन में 30-35 साल की उम्र के बाद सफलता प्राप्त करता है।

4) दशम भाव सामाजिक प्रतिष्ठा का भी भाव माना जाता है। दशम भाव में स्थित शनि के कारण जातक की का सामाजिक व्यवहार उत्तम होता है। जातक सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहता है, खासकर समाज के निचले तबके के हितों के लिए जातक हमेशा प्रयासरत रहता है। जातक को समाज के निकली सबको के द्वारा अच्छी आदर और सम्मान प्राप्त होता है। ऐसा देखा गया है कि दशम भाव में स्थित शनि के कारण जातक अपने सहकर्मियों और इंप्लाइज के द्वारा सम्मान प्राप्त करता है।

5) जातक धनी, समृद्ध, प्रसिद्ध, ज्ञानवान और बहादुर व्यक्ति होगा। जातक कड़ी मेहनत करने वाला व्यक्ति होगा। शनि के चतुर्थ भाव पर पूर्ण दृष्टि होने के कारण जातक मानसिक तनाव का भी सामना करेगा।

6) दशम भाव में स्थित शनि के कारण, जातक निचले तबके के व्यक्तियों का लीडर हो सकता है। जातक राजनीति में सक्रिय हो सकता है। अपनी कुंडली के क्षमता के अनुसार जातक अपने शहर गांव या राज्य का नेता हो सकता है। जातक राजा या राजा के समान व्यक्ति हो सकता है। जातक को समाज में एक पावरफुल व्यक्ति के रूप में जाना जा सकता है। जातक भेद नीति में माहिर होगा जिसका वह अपनी राजनीति में बखूबी उपयोग करेगा।

7)दशम भाव में स्थित जातक को विदेश यात्रा दे सकता है। जातक धार्मिक यात्रा पर भी जा सकता है। जातक अपने प्रोफेशनल जीवन से संबंधित कार्यों के लिए भी यात्रा पर जा सकता है।

8) दशम भाव में स्थित सनी के कारण जातक की जजमेंटल एबिलिटी बहुत ही अच्छी होगी। जातक न्याय प्रिय होगा। यदि कुंडली में संयोग हो तब जातक में न्यायाधीश या सरपंच बन सकता है।

9) दशम भाव में स्थित शनि जातक को बात से संबंधित समस्या दे सकता है। दशम भाव में स्थित शनि जातक के स्वास्थ्य के लिए उत्तम नहीं माना जा सकता है, क्योंकि यह जातक को हॉस्पिटल में भर्ती करवा सकता है।

10)दशम भाव में स्थित शनि के कारण जातक कृषि कार्य से संबंधित कार्य को कर सकता है। जातक लोहे से संबंधित कार्य को भी कर सकता है। जाकर कॉन्ट्रैक्ट या लेबर से संबंधित कार्य भी कर सकता है। जातक माइनिंग या निचले निम्न स्तर के कार्य को ही कर सकता है।

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