कुंडली के प्रथम भाव में राहु का प्रभाव

कुंडली के प्रथम भाव में राहु का प्रभाव

1)कुंडली के प्रथम भाव में राहु का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम राहु और प्रथम भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे।

2) प्रथम भाव में स्थित राहु जातक के शारीरिक बनावट, स्वास्थ्य, मस्तिष्क, स्वभाव और आचार विचार पर गहरा प्रभाव डालता है। जैसा कि हम जानते हैं कि राहु एक छाया ग्रह है, अतः राहु की वास्तविक आकृति किसी भी पौराणिक ग्रंथ में नहीं दी गई है। राहु को धुंया के समान धुंधला कलर वाला और शनि के समान बताया गया है। साथ ही यह माना जाता है कि राहु जिस भाव में हो और जिस राशि में हो वह उस राशि के समान फल देने वाला बन जाता है।

3) राहु एक पापी ग्रह है अतः प्रथम भाव में स्थित राहु स्वास्थ्य के लिए शुभ नहीं माना जाता है। जातक का स्वास्थ्य मध्यम हो सकता है। जातक को मस्तिष्क से संबंधित कोई छुपी हुई बीमारी हो सकती है। जातक ऐसी बीमारी से ग्रसित हो सकता है जो आसानी से पता ना चले या जब जातक का स्वास्थ्य खराब हो तब वह एक डॉक्टर से दूसरे डॉक्टर के पास चक्कर लगाता रहे और फिर भी उसकी बीमारी का पता ना चले। राहु वायरस का कारक है, वायरस जनित रोगों से भी जातक ग्रसित रह सकता है।

4) प्रथम भाव में स्थित राहु के कारण, जातक साइकोलॉजिकल समस्या से पीड़ित हो सकता है। जातक को स्किन से संबंधित समस्या हो सकती है। जातक मति भ्रम का शिकार हो सकता है। जातक मुंह और दातों से संबंधित रोगों का शिकार हो सकता है। प्रथम भाव में स्थित राहु जातक को तामसिक प्रवृत्ति का व्यक्ति बनाता है।

5) राहुल को माया का कारक ग्रह माना गया है। अतः प्रथम भाव में स्थित राहु के कारण जातक माया या छलावा में माहिर हो सकता है। जातक की इमैजिनेशन की कैपेसिटी बहुत ही अद्भुत हो सकती है। जातक किसी भी मैटर का छुपा हुआ सच आसानी से जान लेता है। प्रथम भाव में स्थित राहु जातक की दिमागी शक्ति को बहुत ज्यादा बढ़ाने में सक्षम हो सकता है। जातक स्मार्ट हो सकता है और किसी की भी नकल करने में माहिर हो सकता है।

6) प्रथम भाव में स्थित राहु जातक को अस्थिर चित्त और स्थिर मन का व्यक्ति बना सकता है। जातक अपने आचार व्यवहार को मौके की नजाकत के अनुसार बदलने में माहिर हो सकता है। जातक झूठा हो सकता है, लेकिन वह झूठ भी इतनी सफाई से बोलेगा कि सामने वाला को कभी शक नहीं होगा।

7)प्रथम भाव में स्थित राहु के कारण जातक को सांसारिक सुख और विषय वासना की ओर बहुत ज्यादा झुकाव देता है। जातक मनी माइंडेड हो सकता है। जातक धनी हो सकता है। जातक को अच्छी प्रतिष्ठा और पद की प्राप्ति करवा सकता है। प्रथम भाव में स्थित राहु के कारण जातक किसी भी ऐसे काम को करने में सक्षम होगा जो दूसरों के लिए असंभव हो। लेकिन प्रथम भाव में स्थित राहु के शुभ फल को प्राप्त करने के लिए हमेशा जातक को एक अच्छा गाइड की जरूरत होती है। अन्यथा प्रथम भाव में स्थित राहु एक अनगाइडेड मिसाइल की तरह होता है, जो की क्षमता में तो परिपूर्ण होता है पर कहां पर वार करना है वह उसे पता नहीं होता। प्रथम भाव में राहु के जातक को हमेशा एक गाइड चाहिए जो उससे उसी उसकी क्षमताओं को सही तरीके से यूज़ करना सिखा सके।

8) प्रथम भाव में स्थित राहु जातक को विवादास्पद व्यक्तित्व देता है। जातक हमेशा संदेह पूर्ण दृष्टि से देखा जाता है। जातक अफवाह फैलाने वाला या अफवाह में आसानी से पढ़ जाने वाला व्यक्ति हो सकता है। जातक भड़काऊ स्वभाव का हो सकता है। वह बेवजह की विवाद करने में माहिर हो सकता है। वह अनिश्चित स्वाभाव का व्यक्ति होगा। प्रथम भाव में स्थित राहु के कारण जातक जादू टोना या मयावी चीजों की ओर झुकाव रखने वाला व्यक्ति हो सकता है।

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