कुंडली के दशम भाव में पंचमेश का प्रभाव

कुंडली के दशम भाव में पंचमेश का प्रभाव

1) कुंडली के दशम भाव में पंचमेश का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम दशम भाव और पंचम भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। पंचम भाव का स्वामी स्वयं के भाव से छठे स्थान में स्थित है, अतः प्रथम भाव के स्वामी का छठे भाव में क्या फल होता है, हम इसके बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे।

2)पंचम भाव का स्वामी दशम भाव में बहुत ही शुभ माना जाता है, क्योंकि पंचम भाव यानी लक्ष्मी स्थान का संबंध दशम भाव यानी कि विष्णु स्थान से बनता है।

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3) पंचम भाव पिछले जन्म के पुण्य कर्मों से संबंधित होता है। दशम भाव जातक का कर्म स्थान है। अतः जब पंचम भाव का स्वामी दशम भाव में स्थित हो तब हम कह सकते हैं कि जातक पिछले जन्म की पूण्य कर्मों का भोग करने के लिए इस जन्म में जीवन में प्राप्त किया है। जातक को इस जन्म मे उसके पिछले जन्म के पुण्य कर्मों का सहयोग प्राप्त होगा। जातक पिछले जन्म के उत्तम कर्मों के कारण इस जन्म में उत्तम जीवन का आनंद प्राप्त करेगा।

4) दशम भाव व्यवसाय से संबंधित होता है। यदि पंचम भाव का स्वामी दशम भाव में स्थित हो तब जातक अपने प्रोफेशनल लाइफ में और जीवन में अच्छी सफलता प्राप्त करता है। जातक अपने प्रोफेशनल लाइफ में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करता है। क्योंकि जातक को पिछले जन्म के पुण्य के फलस्वरूप आसान सफलता प्राप्त होती है। कालपुरुष की कुंडली में पंचम भाव का स्वामी सूर्य दशम भाव में शुभ माना जाता है, क्योंकि सूर्य के मकर राशि में गोचर के उपरांत नव वर्ष और नई आशा का सृष्टि में संचार होता है। पंचम भाव का स्वामी दशम भाव मे बहुत ही शुभ माना जाता है और जातक नई ऊर्जा से भरपूर ऊर्जावान व्यक्ति होता है। जातक अपने जीवन में नित्य नए अवसर प्राप्त करता है और इसके कारण जातक को सफलता भी प्राप्त होती है। परंतु इसका यह अर्थ नहीं है कि जातक को बिना मेहनत के सफलता मिल जाएगी। क्योंकि दशम भाव कर्म स्थान है, पंचम भाव का स्वामी दशम भाव में स्थित हो तब जातक को अपने पिछले जन्म के पुण्य कर्मों का लाभ प्राप्त करने के लिए मेहनत करनी पड़ेगी।

5) पंचम भाव धर्म स्थान होता है। दशम भाव कर्म स्थान होता है। यदि पंचम भाव का स्वामी दशम भाव में स्थित हो तब जातक धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय रुप से भाग लेगा। जातक पंडित या पुजारी हो सकता है। जातक किसी धार्मिक संस्था या धार्मिक स्थान पर कार्य कर सकता है। यदि कुंडली सपोर्ट करती हो तब जातक किसी धार्मिक संस्था का प्रधान भी हो सकता है। जातक अपने कर्मों से धर्म का रक्षक होगा। पंचम भाव मंत्रों का भी भाव माना जाता है अतः जातक तंत्र यंत्र से संबंधित प्रोफेशन में भी हो सकता है। जातक मेडिकल से संबंधित प्रोफेशन में भी हो सकता है। जातक सलाहकार भी हो सकता है।

6) पंचम भाव का स्वामी दशम भाव में स्थित हो तब जातक को संतान से संबंधित समस्या हो सकती है, क्योंकि पंचम भाव और दशम भाव एक दूसरे से षडाष्टक है। लेकिन पंचम भाव और दशम भाव दोनों शुभ भाव है अतः बुरे प्रभाव कम होंगे। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यदि पंचम भाव का स्वामी दशम भाव में स्थित हो तब जातक को कम से कम एक पुत्र अवश्य प्राप्त होगा, जो जातक के मृत्यु उपरांत क्रिया कर्म करेगा। यदि पंचम भाव का स्वामी दशम भाव में पीड़ित हो तब जातक की संतान को स्वास्थ्य से संबंधित समस्या हो सकती हैं। जातक की संतान जातक से दूर या अलग निवास कर सकते हैं। यदि पंचम भाव का स्वामी दशम भाव में शुभ स्थिति में हो तब जातक की संतान जातक और जातक के परिवार का नाम रोशन करेंगा।

7) पंचम भाव मानसिकता से संबंधित होता है। यदि पंचम भाव का स्वामी दशम भाव में स्थित होगा तब जातक का सामाजिक आचरण उत्तम होगा। जातक समाज के नियम कायदे और कानून का सख्ती से पालन करेगा। जातक व्यवहारिक होगा, लेकिन थोड़ा सा घमंडी भी होगा। जातक हमेशा धर्म के साथ खड़ा रहेगा।

8) पंचम भाव का स्वामी दशम भाव में स्थित हो तब जातक को उत्तम नाम और प्रसिद्धि प्राप्त होते हैं। जातक समाज में विद्वान व्यक्ति के रूप में प्रसिद्ध होगा।। जातक का सामाजिक आचरण अच्छा होगा।

9) दशम भाव राज्य से संबंधित होता है। पंचम भाव मंत्री पद से संबंधित होता है। यदि पंचम भाव का स्वामी दशम भाव में शुभ स्थिति में हो तब जातक सरकार का सलाहकार या मंत्री, किसी प्रशासनिक पद पर या किसी बड़े या प्रसिद्ध संस्था में सलाहकार हो सकता है।

10)यदि पंचम भाव का स्वामी दशम भाव में स्थित हो तब जातक को पैतृक संपत्ति प्राप्त होती है।11) यदि पंचम भाव का स्वामी दशम भाव के स्वामी के साथ दशम भाव में स्थित हो तब जातक के लिए यह राजयोग बनाता है। जातक सरकार से सहायता प्राप्त करता है। जातक प्रोफेशनल लाइफ में अच्छी सफलता प्राप्त करता है। जातक राजनीति में सक्रिय हो सकता है और राजनीति में सफलता प्राप्त कर सकता है। जातक अच्छा धन अर्जित करेगा। जातक सट्टेबाजी से भी धन अर्जित कर सकता है। कुल मिलाकर अगर हम कहें तब यह एक बहुत ही अच्छा कंबीनेशन है।

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