कुंडली के एकादश भाव में सप्तमेश का प्रभाव

कुंडली के एकादश भाव में सप्तमेश का प्रभाव

1)कुंडली के एकादश भाव में सप्तमेश का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम सप्तम भाव और एकादश भाव के नैसर्गिक कार्य के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। सप्तम भाव का स्वामी स्वयं के भाव से पंचम भाव में स्थित है। अतः प्रथम भाव के स्वामी का पंचम भाव में क्या फल होता है, हम इसके बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे।

2)एकादश भाव को उपचय भाव भी माना जाता है। यदि सप्तम भाव का स्वामी एकादश भाव में स्थित हो तब यह सप्तम भाव के नैसर्गिक कारक में बढ़ोतरी करता है।

3)सप्तम भाव काम त्रिकोण है, एकादश भाव भी एक काम त्रिकोण है। यदि सप्तम भाव का स्वामी एकादश भाव में स्थित हो तब, जातक कामुक प्रवृत्ति का हो सकता है। जातक नैसर्गिक रूप से विपरीत लिंग के लोगो को आकर्षित करने में सक्षम होता है। सप्तम भाव विवाह से संबंधित होता है। यदि सप्तम भाव का स्वामी एकादश भाव में स्थित हो तब जातक के एक से अधिक विवाह की संभावना होती है। जातक के प्रेम संबंध और या कई स्त्रियों के साथ संबंध होने की संभावना होती है।

4) एकादश भाव लाभ स्थान से संबंधित होता है। सप्तम भाव विवाह या पत्नी से संबंधित होता है। यदि सप्तम भाव का स्वामी एकादश भाव में स्थित हो तब जातक को विवाह से धन लाभ की प्राप्ति होती है। जातक विवाह के उपरांत भाग्यशाली हो सकता है। जातक की पत्नी धनी परिवार से संबंधित हो सकती है। जातक अपने व्यापार में या प्रोफेशन में अपनी पत्नी की सहायता प्राप्त करता है। जातक की पत्नी कामकाजी महिला हो सकती है। जातक की पत्नी जातक के नजदीकी परिवार से संबंधित हो सकती है।

5) सप्तम भाव पार्टनरशिप से संबंधित होता है। साथ ही यह दशम भाव का भावत भावम भाव भी होता है। यदि सप्तम भाव का स्वामी एकादश भाव में स्थित हो तब जातक अपने व्यापार में या प्रोफेशन में अच्छी सफलता प्राप्त करता है। जातक को स्त्रियों से मदद मिलती है। जातक स्त्रियों की सहायता से भी धन अर्जित कर सकता है। जातक अपने पार्टनरशिप बिजनेस में भी अच्छा धन अर्जित कर सकता है। जातक विदेशी भूमि से भी धन अर्जित कर सकता है या धन अर्जित करने के लिए अपने जन्म स्थान से दूर जा सकता है।

6) सप्तम भाव मारक भाव है। यदि सप्तम भाव का स्वामी एकादश भाव में स्थित हो तब यह सप्तम भाव के मारक प्रभाव में भी वृद्धि करता है। साथ ही एकादश भाव आयु का सुख का भी भाव है अतः सप्तम भाव का स्वामी एकादश भाव में स्थित हो तब यह निश्चित ही जातक की आयु पर भी प्रभाव डालने में सक्षम है। अतः सप्तम भाव का स्वामी एकादश भाव में यदि सुस्थित ना हो तब यह जातक के लिए एक बुरा मारकेश बन सकता है। यदि सुस्थित हो तब यह बुरे प्रभाव को कम करेगा।

7) सप्तम भाव का स्वामी एकादश भाव से पंचम भाव पर अपनी पूर्ण दृष्टि डालता है। सप्तम भाव पंचम भाव को भी प्रभावित करता है। सप्तमेश का पंचम भाव से संबंध बनाना संतान के लिए शुभ नहीं माना जाता है। बृहत पराशर होरा शास्त्र के अनुसार यदि सप्तमेश एकादश भाव से पंचम भाव पर दृष्टि डालता है तब जातक को कन्या संतति की संख्या अधिक होती है। यदि सप्तम भाव का स्वामी एकादश भाव में स्थित हो तब जातक को उत्तम संतान की प्राप्ति होती है, जो जातक के व्यापार और धन अर्जित करने में अच्छी सहायता करता है।

8) यादव स्वभाव बड़े भाई से संबंधित होता है। यदि सप्तम भाव का स्वामी एकादश भाव में स्थित हो तब जातक के भाई भाग्यशाली होते हैं। जातक को अपने भाइयों के द्वारा सहायता प्राप्त होती है। यदि सप्तम भाव का स्वामी एकादश में पीड़ित हो तब यह जातक के भाइयों के स्वास्थ्य और आयु के लिए शुभ नहीं माना जा सकता है।

9) यदि सप्तम भाव का स्वामी एकादश भाव के स्वामी के साथ एकादश भाव में स्थित हो, तब जातक धनी और समृद्ध हो सकता है। जातक को अपने प्रोफेशनल लाइफ में अच्छी सफलता प्राप्त होती है। जातक पार्टनरशिप बिजनेस में भी सफलता प्राप्त करता है। जातक का व्यापार अपने जन्म स्थान से दूर के स्थानों में भी फैला रह सकता है। साथ ही यदि सप्तम भाव का स्वामी एकादश भाव में स्थिति में ना हो तब जातक के बड़े भाई के आयु और स्वास्थ्य के लिए उत्तम नहीं माना जा सकता है। जातक के स्वास्थ्य के लिए भी उत्तम नहीं माना जाएगा।

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