कुंडली के द्वितीय भाव में अष्टमेश का प्रभाव

कुंडली के द्वितीय भाव में अष्टमेश का प्रभाव 1)कुंडली के द्वितीय भाव में अष्टमेश का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम अष्टम भाव और द्वितीय भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। अष्टम भाव का स्वामी स्वयं के भाव से सप्तम भाव में स्थित है, अतः प्रथम भाव के स्वामी का सप्तम भाव में क्या फल होता है, हम इसके बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) द्वितीय भाव मारक भाव होता है, अष्टम भाव आयु का कारक भाव होता है। यदि अष्टम भाव का स्वामी द्वितीय भाव में स्थित हो तब यह जातक की आयु के […]

» Read more