कुंडली के द्वादश भाव में गुरु का प्रभाव

कुंडली के द्वादश भाव में गुरु का प्रभाव 1)कुंडली के द्वादश भाव में गुरु का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम गुरु और द्वादश भाव के कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) गुरु को धर्म का कारक ग्रह माना गया है अतः द्वादश भाव में स्थित गुरु जातक को धार्मिक और आध्यात्मिक व्यक्ति बनाता है। यदि गुरु द्वादश भाव में पीड़ित हो तब जातक का धर्म का नाश हो सकता है, जिसके फलस्वरूप जातक धर्म का अपमान करने को उत्सुक होगा जातक धार्मिक क्रियाकलापों का विरोध या क्रिटिसाइज करेगा। 3) गुरु को संतान का कारक ग्रह माना गया […]

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कुंडली के एकादश भाव में गुरु का प्रभाव

कुंडली के एकादश भाव में गुरु का प्रभाव 1) कुंडली के एकादश भाव में गुरु का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम गुरु और एकादश भाव के कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) गुरु को धन का कारक ग्रह माना जाता है और गुरु एकादश भाव यानी लाभ स्थान पर विराजित है, अतः हम यह कह सकते हैं कि जातक धनी होगा। जातक उत्तम लाभ अर्जित करेगा। जातक को सभी प्रकार के सांसारिक और भौतिक सुख उपलब्ध होंगे। जातक की सारी इच्छाएं पूर्ति होगी। जातक को अपने मित्रों का और नौकर चाकर का सहायता मिलेगा। जातक को किसी […]

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कुंडली के दशम भाव में गुरु का प्रभाव

कुंडली के दशम भाव में गुरु का प्रभाव 1)कुंडली के दशम भाव में गुरु का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम गुरु और दशम भाव के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2)दशम भाव हमारी सामाजिक प्रतिष्ठा का कारक भाव है, अतः दशम भाव में स्थित गुरु जातक को समाज में उत्तम मान और सम्मान प्राप्त करवाता है। जातक समाज में धार्मिक व्यक्ति के रूप में प्रसिद्ध होगा। जातक अपने अच्छे संस्कारों के लिए जाना जाएगा। यदि दशम भाव में गुरु पीड़ित हो तब जातक को अच्छी प्रसिद्धि तो प्राप्त होगी, पर जातक के कर्म उत्तम नहीं होंगे और वह अपनी […]

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कुंडली के नवम भाव में गुरु का प्रभाव

कुंडली के नवम भाव में गुरु का प्रभाव 1) कुंडली के नवम भाव में गुरु का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम नवम भाव और गुरु के कारक के विषय में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) गुरु एक नैसर्गिक शुभ ग्रह है और नवम भाव एक बहुत ही शुभ भाव है। अतः नवम भाव में स्थित गुरु को जातक के लिए अत्यंत ही शुभ माना जाता है। काल पुरुष की कुंडली में भी नवम भाव का स्वामी गुरु ही है, अतः यह भी एक शुभ स्थिति है की कुंडली के सर्वोत्तम धर्म त्रिकोण में धर्म का कारक गुरु स्थित हो। 3) […]

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कुंडली के अष्टम भाव में गुरु का प्रभाव

कुंडली के अष्टम भाव में गुरु का प्रभाव 1)कुंडली के अष्टम भाव में गुरु का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम गुरु और अष्टम भाव के कारक के संबंध में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) अष्टम भाव आयु से संबंधित भाव होता है और गुरु अष्टम भाव में स्थित होकर जातक को दीर्घायु बनाता है। जातक कफ से संबंधित समस्या का सामना कर सकता है। 3) गुरु को विद्या का कारक ग्रह माना जाता है, अष्टम भाव सीक्रेट या छिपी हुई या गूढ़ रहस्य से संबंधित विद्या से रिलेटेड होता है। अतः अष्टम भाव में स्थित गुरु जातक को ज्योतिष या […]

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कुंडली के सप्तम भाव में गुरु का प्रभाव

कुंडली के सप्तम भाव में गुरु का प्रभाव 1) कुंडली के सप्तम भाव में गुरु का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम सप्तम भाव और गुरु के कारक के विषय में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) सप्तम भाव में स्थित गुरु जातक के आयु और स्वास्थ्य के लिए उत्तम माना जाता है। लेकिन ऐसी मान्यता है कि सप्तम भाव में स्थित गुरु वैवाहिक जीवन के लिए शुभ नहीं माना जाता है। 3) सप्तम भाव से गुरु जातक के लग्न पर पूर्ण दृष्टि डालता है, अतः एक नैसर्गिक शुभ ग्रह के लग्न पर दृष्टि डालना बहुत ही शुभ माना जाता है। प्रसिद्ध […]

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कुंडली के छठे भाव में गुरु का प्रभाव

कुंडली के छठे भाव में गुरु का प्रभाव 1)कुंडली के छठे भाव में गुरु का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम छठे भाव और गुरु के कारक के विषय में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) छठे भाव को हम उपचय भाव बोलते हैं, जब गुरु छठे भाव में हो तो जातक की बुद्धिमता में बढ़ोतरी करता है। जातक बहुत ही बुद्धिमान व्यक्ति होगा। लेकिन छठा भाव एक दु:स्थान है अतः जातक अपनी बुद्धिमता का उपयोग गलत दिशा में या मानवता की हानि के लिए कर सकता है। जातक का झुकाव तंत्र मंत्र इत्यादि में हो सकता है। जातक काला जादू इत्यादि […]

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कुंडली के पंचम भाव में गुरु का प्रभाव

कुंडली के पंचम भाव में गुरु का प्रभाव 1)कुंडली के पंचम भाव में गुरु का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम गुरु और पंचम भाव की कार्य के विषय में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) पंचम भाव को संतान से संबंधित भाव माना गया है, और गुरु संतान का कारक ग्रह है। प्रसिद्ध सिद्धांत “कारको भाव नाशाय” के अनुसार पंचम भाव में स्थित गुरु संतान के लिए शुभ नहीं माना जाता है। अतः पंचम भाव में स्थित गुरु विलंब संतान का कारण हो सकता है या जातक को संतान से संबंधित परेशानी दे सकता है। परंतु यदि पंचम भाव में स्थित […]

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कुंडली के तृतीय भाव में गुरु का प्रभाव

कुंडली के तृतीय भाव में गुरु का प्रभाव 1) कुंडली के तृतीय भाव में गुरु का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम तृतीय भाव और गुरु के कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) तृतीय भाव शुभ उपग्रह अच्छा नहीं माना जाता है। तृतीय भाव में गुरु अस्त माना गया है। गुरु मृदु स्वभाव और नरम आचरण का कारक ग्रह है। तृतीय भाव में स्थित गुरु जातक के साहस में कमी करता है। जातक अपमान का सामना कर सकता है। जातक दूषित विचारों वाला और पाप कर्मों में लिप्त हो सकता है। 3) तृतीय भाव में स्थित गुरु जातक […]

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कुंडली के द्वितीय भाव में गुरु का प्रभाव

कुंडली के द्वितीय भाव में गुरु का प्रभाव 1) कुंडली के द्वितीय भाव में गुरु का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम गुरु और द्वितीय भाव के कारक के विषय में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) द्वितीय भाव में स्थित गुरु के कारण जातक मधुर वचन और प्रिय वचन बोलने वाला व्यक्ति होता है। जातक एक उत्तम वक्ता होता है।उसकी वाणी से उसकी बुद्धिमता की झलक मिलती है । जातक में ओरल लर्निंग सीखने की अच्छी क्षमता होती है। जातक एक अच्छा कवि, एक अच्छा ज्योतिषी और एक अच्छा वक्ता हो सकता है। जातक एक अच्छा लेखक या अच्छा वैज्ञानिक हो […]

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