कुंडली के चतुर्थ भाव में गुरु का प्रभाव

कुंडली के चतुर्थ भाव में गुरु का प्रभाव 1) कुंडली के चतुर्थ भाव में गुरु का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम चतुर्थ भाव और गुरु के कारक के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) चतुर्थ भाव सुख स्थान होता है और गुरु सुख का कारक ग्रह है। अतः चतुर्थ भाव में स्थित गुरु जातक को उत्तम सुख और सुविधा प्रदान करता है। जातक जीवन में उत्तम और आराम से जिंदगी व्यतीत करेगा। जैसा कि हम जानते हैं कि काल पुरुष की कुंडली में चतुर्थ भाव में गुरु उच्च का होता है। अतः चतुर्थ भाव में स्थित गुरु जातक की […]

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कुंडली के द्वादश भाव में मंगल का प्रभाव

कुंडली के द्वादश भाव में मंगल का प्रभाव 1)कुंडली के द्वादश भाव में मंगल का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम मंगल और द्वादश भाव के कारकों के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) द्वादश भाव में स्थित मंगल मांगलिक दोष का निर्माण करता है। साथ ही द्वादश भाव की स्थित मंगल कई प्रकार के बुरे प्रभाव भी देता है। अतः द्वादश भाव में स्थित मंगल शुभ नहीं माना जाता है। 3) द्वादश भाव शयन सुख का कारक भाव है। मंगल एक पापी ग्रह के रूप में द्वादश भाव में स्थित होकर व्यक्ति के शयन सुख को कम करता है। […]

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कुंडली के एकादश भाव में मंगल का प्रभाव

कुंडली के एकादश भाव में मंगल का प्रभाव 1)कुंडली के एकादश भाव में मंगल का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम मंगल और एकादश भाव के कारक के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) एकादश भाव में स्थित मंगल बली माना जाता है। मंगल काल पुरुष का लग्नेश है अतः एकादश भाव में यह कुंडली के बल को बढ़ाता है। जैसा कि हम जानते हैं नैसर्गिक पापी ग्रह उपचय भाव में शुभ फल देते हैं अतः एकादश भाव में स्थित मंगल जातक के लिए अच्छा माना जा सकता है। 3) मंगल एक्शन का कारक ग्रह है, अत: एकादश भाव में […]

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कुंडली के दशम भाव में मंगल का प्रभाव

कुंडली के दशम भाव में मंगल का प्रभाव 1) कुंडली के दशम भाव में मंगल का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम दशम भाव और मंगल के कारक के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) मंगल को दशम भाव में नैसर्गिक दिग्बल प्राप्त होता है। साथ ही मंगल काल पुरुष की कुंडली में दशम भाव में उच्च का होता है। दशम भाव में स्थित मंगल उत्तम फल देता है। मंगल शक्ति का कारक ग्रह है, अतः जातक शारीरिक रूप से और बहादुर होगा। जातक कार्यवाही में विश्वास रखने वाला व्यक्ति होगा। जातक ऊर्जावान होगा और किसी भी प्रकार के बहादुरी […]

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कुंडली के नवम भाव में मंगल का प्रभाव

कुंडली के नवम भाव में मंगल का प्रभाव 1)कुंडली के नवम भाव में मंगल का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम मंगल और नवम भाव के कारक के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2)नवम भाव में मंगल शुभ माना जाता है क्योंकि काल पुरुष के लग्न का स्वामी काल पुरुष के भाग्य स्थान में बैठा है। नवम भाव का मंगल जातक को भाग्यशाली प्रसिद्ध और धनी व्यक्ति बनाता है। जातक धार्मिक प्रवृत्ति का हो सकता है। 3) नवम भाव धर्म त्रिकोण से संबंधित होता है। मंगल एक्शन का कारक ग्रह है। नवम भाव में स्थित मंगल जातक को धार्मिक क्रियाकलापों की […]

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कुंडली के अष्टम भाव में मंगल का प्रभाव

कुंडली के अष्टम भाव में मंगल का प्रभाव 1) कुंडली के अष्टम भाव में मंगल के प्रभाव को जानने के लिए सर्वप्रथम हम मंगल और अष्टम भाव के कारक के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) अष्टम भाव में स्थित मंगल मांगलिक दोष का कारण होता है । अतः अष्टम भाव में स्थित मंगल वैवाहिक जीवन के लिए शुभ नहीं माना जाता है। यदि अष्टम भाव में स्थित मंगल नैसर्गिक शुभ ग्रह से दृष्ट हो तब बुरे प्रभाव कम हो सकते हैं। लेकिन यदि अष्टम भाव में स्थित मंगल नैसर्गिक अशुभ ग्रह से दृष्ट हो तब परिस्थिति चिंताजनक हो सकती है। […]

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कुंडली के सप्तम भाव में मंगल का प्रभाव

कुंडली के सप्तम भाव में मंगल का प्रभाव 1)कुंडली के सप्तम भाव में मंगल के प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम मंगल और सप्तम भाव के कारक के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) सप्तम भाव का मंगल मांगलिक दोष का निर्माण करता है। ऐसा माना जाता है मांगलिक दोष के कारण जातक की वैवाहिक जीवन अच्छा नहीं होता है । साथ‌ ही यह माना जाता है कि यदि मंगल सप्तम भाव में स्वराशि का हो या योगकारक हो या लग्नेश हो तब बहुत ज्यादा बुरा प्रभाव नहीं देता है। अन्यथा मंगल सप्तम भाव में शुभ नहीं माना जाता है। […]

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कुंडली के छठे भाव में मंगल का प्रभाव

कुंडली के छठे भाव में मंगल का प्रभाव 1) कुंडली के छठे भाव में मंगल का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम मंगल और छठे भाव के कारक के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) छठे भाव में स्थित मंगल शुभ माना जाता है क्योंकि यह कुंडली को एक नैसर्गिक बल देता है । जातक बहादुर और शारीरिक क्षमता में उत्तम होगा। जातक ऊर्जावान और कार्य करने में अग्रणी होगा। जातक झगड़ालू या तर्क करने वाला व्यक्ति हो सकता है। 3)छठा भाव शत्रु का भाव माना जाता है। यदि मंगल छठे भाव में हो तब जातक अपने शत्रु पर विजय […]

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कुंडली के पंचम भाव में मंगल का प्रभाव

कुंडली के पंचम भाव में मंगल का प्रभाव 1) कुंडली के पंचम भाव में मंगल का प्रभाव जानने से पहले सर्वप्रथम हम कुंडली के पंचम भाव और मंगल के कारक के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) पंचम भाव संतान से संबंधित भाव होता है‌। मंगल एक पापी ग्रह है। यदि मंगल पंचम भाव में पीड़ित हो तब जातक को संतान उत्पत्ति में परेशानी दे सकता है। अगर मंगल पंचम भाव में एक से ज्यादा पापी ग्रह से पीड़ित हो तब हम कह सकते हैं कि जातक को गर्भपात की समस्या हो सकती है। जातक का अपनी संतान के साथ […]

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कुंडली के चतुर्थ भाव में मंगल का प्रभाव

कुंडली के चतुर्थ भाव में मंगल का प्रभाव 1)कुंडली के चतुर्थ भाव में मंगल का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम मंगल और चतुर्थ भाव के कारक के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) चतुर्थ भाव में स्थित मंगल मांगलिक दोष का कारक होता है। अतः यह वैवाहिक जीवन के लिए शुभ नहीं माना जाता है । काल पुरुष की कुंडली में मंगल चतुर्थ स्थान यानी कि कर्क राशि में नीच का होता है। यह भी एक कारण है कि मंगल चतुर्थ भाव में अच्छा नहीं माना जाता है। 3) चतुर्थ भाव मन का कारक भाव होता है। जब मंगल […]

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