कुंडली के द्वादश भाव में राहु का प्रभाव

कुंडली के द्वादश भाव में राहु का प्रभाव 1)कुंडली के द्वादश भाव में राहु का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम कुंडली के द्वादश भाव और राहु के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) द्वादश भाव में स्थित राहु जातक को नेत्र से संबंधित समस्या दे सकता है। साथ ही द्वादश भाव में स्थित राहु जातक को जल से संबंधित रोग दे सकता है, जैसे डायरिया इत्यादि। द्वादश भाव में स्थित राहु जातक को हृदय से संबंधित समस्या दे सकता है। 3) द्वादश भाव में स्थित राहु जातक को बहुत ज्यादा बहादुर बनाता है। जातक अपनी शत्रु […]

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कुंडली के एकादश भाव में राहु का प्रभाव

कुंडली के एकादश भाव में राहु का प्रभाव 1)कुंडली के एकादश भाव में राहु का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम राहु और एकादश भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) एकादश भाव उपचय भाव होता है और ऐसा माना जाता है कि नैसर्गिक पापी ग्रह उपचय भाव में शुभ फल देते हैं। अतः राहु एकादश भाव में उत्तम माना जाता है। 3) ऐसी मान्यता है कि राहु जिस भाव में स्थित होता है उस भाव के नैसर्गिक कारकत्व को यह बढ़ा देता है, खासकर भाव के भौतिकवादी फल को। अतः एकादश भाव जो कि लाभ […]

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कुंडली के दशम भाव में राहु का प्रभाव

कुंडली के दशम भाव में राहु का प्रभाव 1)कुंडली के दशम भाव में राहु का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम राहु और दशम भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) दशम भाव जातक की जीविका या प्रोफेशन का भाव होता है। राहु विदेशी वस्तुएं, आधुनिक या अपारंपरिक चीजें, कला से संबंधित, सिनेमा से संबंधित कार्य से संबंधित होता है। अतः दशम भाव में स्थित राहु के कारण जातक कलाकार हो सकता है, लेखक हो सकता है, एक्टर हो सकता है, या कवि भी हो सकता है। दशम भाव में स्थित राहु के कारण जातक कंप्यूटर […]

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कुंडली के अष्टम भाव में राहु का प्रभाव

कुंडली के अष्टम भाव में राहु का प्रभाव 1) कुंडली के अष्टम भाव में राहु का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम राहु और अष्टम भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) अष्टम भाव आयुष भाव होता है। अष्टम भाव में स्थित राहु जातक को अल्पायु बना सकता है, लेकिन ऐसा हर कुंडली में नहीं होगा। अष्टम भाव में स्थित राहु अस्वाभिवक मृत्यु का कारण हो सकता है। अष्टम भाव में स्थित राहु के कारण विष या सांप के काटने से मृत्यु हो सकती है। अष्टम भाव में स्थित राहु पर यदि शुभ ग्रह के प्रभाव […]

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कुंडली के सप्तम भाव में राहु का प्रभाव

कुंडली के सप्तम भाव में राहु का प्रभाव 1)कुंडली के सप्तम भाव में राहु के प्रभाव को जानने के लिए सर्वप्रथम राहु और सप्तम भाव से नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) सप्तम भाव को विवाह स्थान माना जाता है जब राहु सप्तम भाव में हो तब जातक के विवाह के समय कुछ घटनाएं या किसी प्रकार का अननेसेसरी ड्रामा या नाटक हो सकता है। 3)सप्तम भाव में स्थित राहु के कारण जातक का जीवन साथी जातक के जाति या संस्कार से भिन्न जाति या संस्कार का हो सकता है। जातक का जीवन साथी विदेशी हो सकता […]

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कुंडली के छठे भाव में राहु का प्रभाव

कुंडली के छठे भाव में राहु का प्रभाव 1)कुंडली के छठे भाव में राहु का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम राहु और छठे भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) छठा भाव को उपचय भाव माना जाता है। राहु एक नैसर्गिक पापी ग्रह है। ऐसी मान्यता है कि नैसर्गिक पापी ग्रह उपचय भाव में शुभ फल देते हैं। अतः हम यह मान सकते हैं कि छठे भाव में स्थित राहु शुभ फल देने में सक्षम है। 3) कुंडली में छठे भाव को शत्रु भाव माना जाता है। जब राहु छठे भाव में हो तब जातक […]

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कुंडली के पंचम भाव में राहु का प्रभाव

कुंडली के पंचम भाव में राहु का प्रभाव 1)कुंडली के पंचम भाव में राहु का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम पंचम भाव और राहु के नैसर्गिक कार्य के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) पंचम भाव संतान से संबंधित भाव होता है। राहु एक पापी ग्रह है, अतः पंचम भाव में पितृ दोष उत्पन्न करता है। शास्त्रों के अनुसार मेष राशि का, वृष राशि का, कर्क राशि के राहु के कारण पितृ दोष नहीं लगता है। पितृ दोष के कारण जातक को संतान उत्पत्ति में परेशानी का सामना करना पड़ता है। राहु यदि पंचम भाव में बहुत ज्यादा पीड़ित […]

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कुंडली के चतुर्थ भाव में राहु का प्रभाव

कुंडली के चतुर्थ भाव में राहु का प्रभाव 1)कुंडली के चतुर्थ भाव में राहु का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम चतुर्थ भाव और राहु के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2)सामान्य तथा चतुर्थ भाव में राहु को अशुभ माना जाता है, क्योंकि चतुर्थ भाव में स्थित राहु जातक के जीवन में बहुत सारी परेशानी खड़ी करती है। जातक के मन, शिक्षा, माता का सुख और बाल्यावस्था को भी प्रभावित करती है। 3) चतुर्थ भाव जातक के मन का कारक भाव होता है। अतः चतुर्थ भाव में स्थित राहु के कारण जातक अशांत मन का व्यक्ति होता […]

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कुंडली के तृतीय भाव में राहु का प्रभाव

कुंडली के तृतीय भाव में राहु का प्रभाव 1) कुंडली के तृतीय भाव में राहु का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम राहु और तृतीय भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) तृतीय भाव जातक की क्षमता का कारक भाव होता है। राहु एंपलीफायर एजेंट के रूप में कार्य करता है। अतः तृतीय भाव में स्थित होकर राहु जातक को क्षमता को बहुत ज्यादा बढ़ा देता है। अतः जातक शेर के समान बहादुर व्यक्ति होगा। यदि तृतीय भाव में राहु पीड़ित हो तब जातक सिर्फ दिखावे के लिए बहादुर व्यक्ति होगा अर्थात जातक की अंदरूनी शक्ति […]

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कुंडली के द्वितीय भाव में राहु का प्रभाव

कुंडली के द्वितीय भाव में राहु का प्रभाव 1)कुंडली के द्वितीय भाव में राहु का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम राहु और द्वितीय भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) राहु के द्वितीय भाव में स्थित होने से जातक मीठा वचन बोलता है। वह अपने लुभावनी वचनों से लोगों को छल करने की नियत रखता है। जातक झूठा वचन बोलने वाला व्यक्ति होगा, लेकिन वह झूठ को भी बड़ी ही सफाई से बोलेगा। 3) द्वितीय भाव में स्थित राहु के कारण जातक अफवाह फैलाने में माहिर होगा। जातक अपने वचन का पक्का नहीं होगा। जातक […]

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