कुंडली के द्वितीय भाव में शनि का प्रभाव

कुंडली के द्वितीय भाव में शनि का प्रभाव 1) कुंडली के द्वितीय भाव में शनि का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम शनि और द्वितीय भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) द्वितीय भाव में स्थित शनि के कारण जातक रुखा वचन बोलने वाला व्यक्ति हो सकता है। शनि भेद नीति का कारक है, अतः जातक अपनी वाणी के द्वारा विवाद या दूसरों का क्रिटिसाइज करने में वाला हो सकता है। जातक का यह आचरण जातक को परेशानी में या विवादों में डालने वाला हो सकता है। 3) शनि की दृष्टि नीच प्रवृत्ति की होती है, शनि […]

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कुंडली के प्रथम भाव मे शनि का प्रभाव

कुंडली के प्रथम भाव में शनि का प्रभाव 1) कुंडली के प्रथम भाव में शनि का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम प्रथम भाव और शनि के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) शनि एक नैसर्गिक पापी ग्रह है। प्रथम भाव में शनि का फलादेश करने के लिए सर्वप्रथम हमें कुंडली में शनि की स्थिति पर गौर करना चाहिए। प्रायः शनि किसी भी भाव में उत्तम नहीं माना जाता है क्योंकि यह जिस भाव में बैठेगा उस भाव के शुभ कारको का नाश करता है। शास्त्रों के अनुसार यदि शनि अपनी उच्च राशि में या अपने स्वयं […]

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