कुंडली के द्वादश भाव में सूर्य का प्रभाव

कुंडली के द्वादश भाव में सूर्य का प्रभाव 1)कुंडली के द्वादश भाव में सूर्य के प्रभाव को जानने के लिए सर्वप्रथम हम सूर्य और द्वादश भाव के कारक के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) द्वादश भाव में सूर्य जातक को प्रसिद्ध और भाग्यशाली बनाता है। जातक की प्रसिद्धि जन्म स्थान से दूर के स्थलों में भी हो सकती है। 3) सूर्य पिता का कारक ग्रह है और यह द्वादश भाव में विराजमान है, अतः जातक का अपने पिता के साथ मतभेद या मत भी नेता या अलगाव की स्थिति बन सकती है। सूर्य द्वादश भाव में यदि उत्तम स्थिति […]

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कुंडली के एकादश भाव में सूर्य का प्रभाव

कुंडली के एकादश भाव में सूर्य का प्रभाव 1) कुंडली के एकादश भाव में सूर्य के प्रभाव को जानने से पहले सर्वप्रथम हम एकादश भाव और सूर्य के कारक के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) एकादश भाव लाभ स्थान है, साथ ही यह एक उपचय हाउस है । सूर्य एकादश भाव में जातक के नैसर्गिक रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। अतः हम कह सकते हैं कि जातक दीर्घायु होगा और उसका स्वास्थ्य उत्तम होगा। 3) सूर्य सरकार और प्रशासन का कारक होता है। सूर्य एकादश भाव में जातक को प्रशासन या सरकार द्वारा लाभ प्राप्त करवाता है। सूर्य […]

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कुंडली के दशम भाव में सूर्य का प्रभाव

कुंडली के दशम भाव में सूर्य का प्रभाव 1) कुंडली के दशम भाव में सूर्य के प्रभाव को जानने से पहले सर्वप्रथम हम सूर्य और दशम भाव के कारक के बारे में जानकारी प्राप्त कर लेते हैं। 2)सूर्य दशम भाव में बहुत ही शुभ माना जाता है क्योंकि दशम भाव में सूर्य को दिग्बल की प्राप्ति होती है। 3) दशम भाव को कर्मस्थान माना जाता है । सूर्य के दशम भाव में विराजमान होने के कारण जातक को अपने सभी कार्यों में सफलता मिलती है। जातक मस्तिष्क से बुद्धिमान बहादुर और निडर प्रवृत्ति का होता है। जातक पिछले जन्मों की […]

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कुंडली के नवम भाव में सूर्य का प्रभाव

कुंडली के नवम भाव में सूर्य का प्रभाव 1)कुंडली के नवम भाव में सूर्य के प्रभाव को जानने के लिए सर्वप्रथम हम सूर्य और नवम भाव के कारकत्व को जानने का प्रयास करेंगे। 2) सूर्य पिता का नैसर्गिक कारक है और नवम भाव भी पिता का कारक हाउस है, अतः सूर्य नवम भाव में पिता के लिए अच्छा शुभ नहीं माना जाता है। जातक के पिता को स्वास्थ्य से संबंधित समस्या हो सकती है । अगर सूर्य नवम भाव में बहुत ज्यादा पीड़ित हो तो जातक को पिता के सुख में कमी या पिता की मृत्यु जैसी बुरे प्रभाव भी […]

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कुंडली के अष्टम भाव में सूर्य का प्रभाव

कुंडली के अष्टम भाव में सूर्य का प्रभाव 1) कुंडली के अष्टम भाव में सूर्य के प्रभाव को जानने से पहले हम सूर्य और अष्टम भाव के कारकत्व को जान लेते हैं। 2) अष्टम भाव मृत्यु से संबंधित भाव होता है, अतः सूर्य अष्टम भाव में जातक के मध्यम आयु की ओर इशारा करता है। यदि सूर्य अष्टम भाव में बली हो और सुस्थित हो तो यह जातक को दीर्घायु बनाता है, लेकिन यदि सूर्य अष्टम भाव में पीड़ित हो और निर्बल हो तब यह जातक के मध्यम आयु का स्पष्ट रूप से संकेत देता है। 3) जैसा कि हम […]

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कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य का प्रभाव

कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य का प्रभाव 1) कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य का प्रभाव जानने के लिए सबसे पहले हमें सूर्य और सप्तम भाव के कारकत्व को समझना चाहिए। 2) काल पुरुष की कुंडली में सप्तम भाव तुला राशि से संबंधित होता है और सूर्य तुला राशि में नीच का होता है अतः व्यवहारिक रूप से सप्तम भाव में सूर्य अच्छा नहीं माना जाता है। 3) सप्तम भाव विवाह से संबंधित भाव होता है। जब सूर्य सप्तम भाव में विराजमान हो तो यह विवाह के लिए अच्छा नहीं माना जाता है। जातक को अपने वैवाहिक जीवन से […]

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कुंडली के छठे भाव में सूर्य का प्रभाव

कुंडली के छठे भाव में सूर्य का प्रभाव 1) कुंडली के षष्टम भाव में सूर्य के प्रभाव को जानने के लिए सर्वप्रथम हम सूर्य और षष्टम भाव के कार्यक्रमों के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) छठा भाव शत्रु भाव होता है, सूर्य ग्रहों के राजा हैं , जब सूर्य छठे भाव में विराजमान हो तो जातक अपने शत्रु पर विजय प्राप्त करता है और शत्रु का सफलतापूर्वक दमन कर देता है। जातक में शत्रु से पार पाने की नैसर्गिक क्षमता होती है । जातक शक्तिशाली होता है और उसके शत्रु उससे भय खाते हैं या उससे शत्रुता कोई नहीं […]

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कुंडली के पंचम भाव में सूर्य का प्रभाव

कुंडली के पंचम भाव में सूर्य का प्रभाव 1) कुंडली के पंचम भाव में सूर्य के प्रभाव को जानने के लिए सर्वप्रथम हम सूर्य और पंचम भाव के कारकत्व का अध्ययन करेंगे। 2) पंचम भाव संतान से संबंधित होता है। सूर्य पंचम भाव में संतान के संबंध में अच्छा नहीं माना जाता है, यदि सूर्य पंचम भाव में बुरी स्थिति में हो तब जातक को संतान प्राप्ति में देरी की संभावना होती है। यदि सूर्य पंचम भाव में स्थित हो तो नकारात्मक प्रभाव कम हो जाते हैं। सूर्य पंचम भाव में जातक के प्रथम संतान बहुत ही अच्छी प्रसिद्धि देता […]

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कुंडली के चतुर्थ भाव में सूर्य का प्रभाव

कुंडली के चतुर्थ भाव में सूर्य का प्रभाव 1)कुंडली के चतुर्थ भाव में सूर्य के प्रभाव को जानने से पहले हमें सूर्य और चतुर्थ भाव के सिग्निफिकेंट को या कारकत्व को जानना चाहिए। 2) सूर्य को चतुर्थ भाव में कोई दिग्बल प्राप्त नहीं होता है अतः हम यह कह सकते हैं कि सूर्य चतुर्थ भाव में शुभ फल को कम करेगा या अपने कार्यकत्व को कमजोर करेगा। 3) चतुर्थ भाव और सूर्य दोनों हृदय के नैसर्गिक कारक हैं अतः “कारको भाव नाशाय” है इस सूत्र के अनुसार सूर्य चतुर्थ भाव में हृदय से संबंधित समस्या को दे सकता है। अतः […]

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कुंडली के तृतीय भाव में सूर्य का प्रभाव

कुंडली के तृतीय भाव में सूर्य का प्रभाव 1) कुंडली के तृतीय भाव में सूर्य के प्रभाव को जानने से पहले हमें सूर्य और तृतीय भाव के कार्यक्रम के बारे में जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए। 2)तृतीय भाव जातक के छोटे भाई के बारे में शारीरिक और मानसिक क्षमता के बारे में और संवाद और कम्युनिकेशन कान के बारे में बताता है। 3)तृतीय भाव दुस्ःस्थान और उपचय भाव होता है। ऐसा माना जाता है कि नैसर्गिक पापी ग्रह तृतीय भाव में अच्छा फल देते हैं, अतः एक नैसर्गिक पापी ग्रह के रूप में सूर्य तृतीय भाव में अच्छा फल देगा। […]

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