कुंडली के पंचम भाव मे अष्टमेश का प्रभाव

कुंडली के पंचम भाव मे अष्टमेश का प्रभाव 1) कुंडली के पंचम भाव में अष्टमेश का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम पंचम भाव और अष्टम भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। अष्टम भाव का स्वामी स्वयं के भाव से दशम भाव में स्थित है, अतः प्रथम भाव के स्वामी का दशम भाव में क्या फल होता है, इसकी भी जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) अष्टम भाव और पंचम भाव एक दूसरे से चतुर्थ- दशम संबंध बनाते हैं, जैसा कि हम जानते हैं यदि किसी भाव का स्वामी स्वयं से दशम भाव में स्थित हो तब वह […]

» Read more

कुंडली के चतुर्थ भाव में अष्टमेश का प्रभाव

कुंडली के चतुर्थ भाव में अष्टमेश का प्रभाव 1)कुंडली के चतुर्थ भाव में अष्टमेश का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम अष्टम भाव और चतुर्थ भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। अष्टम भाव का स्वामी स्वयं के भाव से नवम भाव में स्थित है, अतः प्रथम भाव के स्वामी का नवम भाव में क्या फल होता है, हम इसके बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे। 2)यदि अष्टम भाव का स्वामी चतुर्थ भाव में स्थित हो तब हमें इसका विश्लेषण बड़ी ही सतर्कता से करना पड़ता है। क्योंकि अष्टम भाव का स्वामी स्वयं के भाव से नवम […]

» Read more

कुंडली के तृतीय भाव में अष्टमेश का प्रभाव

कुंडली के तृतीय भाव में अष्टमेश का प्रभाव 1) कुंडली के तृतीय भाव में अष्टमेश का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम तृतीय भाव और अष्टम भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। अष्टम भाव का स्वामी स्वयं के भाव से अष्टम भाव में स्थित है, अतः प्रथम भाव के स्वामी का अष्टम भाव में क्या फल होता है, हम इसके बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) तृतीय भाव एक उपचय भाव होता है। अष्टम भाव का स्वामी तृतीय भाव में स्थित हो तब यह अष्टम भाव के नैसर्गिक कारकत्व में वृद्धि करता है। तृतीय भाव […]

» Read more

कुंडली के द्वितीय भाव में अष्टमेश का प्रभाव

कुंडली के द्वितीय भाव में अष्टमेश का प्रभाव 1)कुंडली के द्वितीय भाव में अष्टमेश का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम अष्टम भाव और द्वितीय भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। अष्टम भाव का स्वामी स्वयं के भाव से सप्तम भाव में स्थित है, अतः प्रथम भाव के स्वामी का सप्तम भाव में क्या फल होता है, हम इसके बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) द्वितीय भाव मारक भाव होता है, अष्टम भाव आयु का कारक भाव होता है। यदि अष्टम भाव का स्वामी द्वितीय भाव में स्थित हो तब यह जातक की आयु के […]

» Read more

कुंडली के प्रथम भाव में अष्टमेश का प्रभाव

कुंडली के प्रथम भाव में अष्टमेश का प्रभाव 1)कुंडली के प्रथम भाव में अष्टमेश का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम अष्टम भाव और प्रथम भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। अष्टम भाव का स्वामी स्वयं के भाव से छठे स्थान में स्थित है, अतः प्रथम भाव के स्वामी का छठा भाव में क्या फल होता है, हम इसके बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे। 2)यदि अष्टम भाव का स्वामी प्रथम भाव में स्थित हो तब यह जातक के लिए अशुभ माना जाता है। अष्टम भाव दु:स्थान होता है और प्रथम भाव जातक से संबंधित होता […]

» Read more

कुंडली के द्वादश भाव में सप्तमेश का प्रभाव

कुंडली के द्वादश भाव में सप्तमेश का प्रभाव 1)कुंडली के द्वादश भाव में सप्तमेश का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम सप्तम भाव और द्वादश भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। सप्तम भाव का स्वामी स्वयं के भाव से छठे भाव में स्थित है, अतः प्रथम भाव के स्वामी का छठा भाव में क्या फल होता है, हम इसके बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) सप्तम भाव और द्वादश भाव एक दूसरे से षडाष्टक संबंध बनाते हैं। अतः सप्तम भाव का स्वामी द्वादश भाव में स्थित हो तब यह शुभ नहीं माना जा सकता है। […]

» Read more

कुंडली के एकादश भाव में सप्तमेश का प्रभाव

कुंडली के एकादश भाव में सप्तमेश का प्रभाव 1)कुंडली के एकादश भाव में सप्तमेश का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम सप्तम भाव और एकादश भाव के नैसर्गिक कार्य के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। सप्तम भाव का स्वामी स्वयं के भाव से पंचम भाव में स्थित है। अतः प्रथम भाव के स्वामी का पंचम भाव में क्या फल होता है, हम इसके बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे। 2)एकादश भाव को उपचय भाव भी माना जाता है। यदि सप्तम भाव का स्वामी एकादश भाव में स्थित हो तब यह सप्तम भाव के नैसर्गिक कारक में बढ़ोतरी करता है। 3)सप्तम […]

» Read more

कुंडली के दशम भाव में सप्तमेश का प्रभाव

कुंडली के दशम भाव में सप्तमेश का प्रभाव 1) कुंडली के दशम भाव में सप्तमेश का प्रभाव जानने से पहले हम सप्तम भाव और दशम भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। सप्तम भाव का स्वामी स्वयं के भाव से चतुर्थ भाव में स्थित है, अतः प्रथम भाव के स्वामी का चतुर्थ भाव में क्या फल होता है, हम इसके बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे। 2)सप्तम भाव दशम भाव का भावत भावम भाव होता है। अतः सप्तम भाव का स्वामी दशम भाव में स्थित हो तब दशम भाव को नैसर्गिक बल प्राप्त होता है। 3) दशम […]

» Read more

कुंडली के नवम भाव में सप्तमेश प्रभाव

कुंडली के नवम भाव में सप्तमेश प्रभाव 1) कुंडली के नवम भाव में सप्तमेश का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम सप्तम भाव और नवम भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करते हैं। सप्तम भाव का स्वामी स्वयं के भाव से तृतीय स्थान में स्थित है, अतः प्रथम भाव के स्वामी का तृतीय भाव में क्या फल होता है, हम इसके बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) सप्तम भाव का स्वामी नवम भाव में शुभ नहीं माना जाता है। नवम भाव एक धर्म त्रिकोण होता है, सप्तम भाव काम त्रिकोण होता है। अतः सामाजिक मान्यता के […]

» Read more

कुंडली के अष्टम भाव में सप्तमेश का प्रभाव

कुंडली के अष्टम भाव में सप्तमेश का प्रभाव 1) कुंडली के अष्टम भाव में सप्तमेश का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम सप्तम भाव और अष्टम भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। सप्तम भाव का स्वामी स्वयं के भाव से द्वितीय स्थान में स्थित है, अतः प्रथम भाव के स्वामी का द्वितीय भाव में क्या फल होता है, हम इसके बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) यदि सप्तम भाव का स्वामी अष्टम भाव में स्थित है और एक दूसरे से द्वि द्वादश संबंध स्थापित करता है, जो कि एक उत्तम संबंध नहीं माना जाता है। […]

» Read more
1 2