कुंडली के सप्तम भाव में नवमेश का प्रभाव

कुंडली के सप्तम भाव में नवमेश का प्रभाव

1)कुंडली के सप्तम भाव में नवमेश का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम सप्तम भाव और नवम भाव के नैसर्गिक कार्य के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। नवम भाव का स्वामी स्वयं के भाव से का दशम भाव में स्थित है, अतः हम प्रथम भाव का स्वामी एकादश भाव में स्थित हो तब क्या फल होता है इसके बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे।

2) बृहत पाराशरा होरा शास्त्र के अनुसार यदि नवम भाव का स्वामी सप्तम भाव में स्थित हो तब यह शुभ माना जाता है। परंतु वर्तमान समय के अनुभवी ज्योतिषियों के द्वारा यह बताया गया है कि सप्तम भाव में स्थित नवमेश शुभ फल नहीं देता है। कुंडली के सर्वाधिक शुभ भाव का स्वामी का एक काम त्रिकोण में स्थित होना, जातक के धर्म के हिसाब से भी शुभ नहीं माना जाता है। जातक धार्मिक गतिविधियों को व्यापार के समान उपयोग करेगा। जातक धर्म में आस्था अपनी इच्छा पूर्ति के लिए रखेगा। जातक धार्मिक भावना से अधिक मोह माया में लिप्त रहेगा। यदि नवम भाव का स्वामी सप्तम भाव में बली हो तब जातक धर्म की ओर अत्यधिक झुकाव रखने वाला व्यक्ति होगा और वह वैराग्य की ओर झुकाव रखेगा। यह स्थिति भी मनुष्य के लिए भी पुरुषार्थ के लिए शुभ नहीं है।

3) नवम भाव भाग्य का कारक भाव है। सप्तम भाव पत्नी का कारक भाव है। यदि नवम भाव का स्वामी सप्तम भाव में स्थित हो तब जातक की पत्नी भाग्यशाली होती है। जातक विवाह के पश्चात आर्थिक संपन्नता प्राप्त करता है। जातक की पत्नी का स्वभाव उत्तम होता है। जातक की पत्नी धार्मिक विचारों वाली महिला होती है। जातक की पत्नी बुद्धिमान महिला होती है। जातक की पत्नी जातक को सही दिशा में गाइड करती है। यदि नवम भाव का स्वामी सप्तम भाव में पीड़ित हो तब जातक की पत्नी का स्वास्थ्य कमजोर होता है और जातक की पत्नी स्वास्थ्य संबंधित समस्या से पीड़ित रहती है।

4) सप्तम भाव और नवम भाव दोनों यात्रा के कारक भाव होते हैं। यदि नवम भाव लंबी यात्रा की दूरी से संबंधित होता है और सप्तम भाव जन्म स्थान से सुदूर स्थान पर यात्रा का कारक होता है। अतः नवम भाव का स्वामी सप्तम भाव में स्थित तक यह जातक की लंबी यात्रा का कारक होता है। जातक के विदेश यात्रा की भी संभावना बनती है। जातक जन्म स्थान से सुदूर स्थान पर उत्तम प्रसिद्धि और सफलता प्राप्त करता है। जातक के पिता विदेश या जन्म स्थान से सुदूर स्थान पर निवास कर सकते हैं।

5) सप्तम भाव मारक भाव होता है। नवम भाव भाग्यस्थान होता है, अगर हम इसका शाब्दिक अर्थ निकालने का प्रयास करें तब हम कह सकते हैं कि नवम भाव का स्वामी सप्तम भाव में स्थित होकर सप्तम भाव के मारक प्रभाव में भी वृद्धि कर सकता है। परंतु नवम भाव शुभ स्थान होता है। अतः नवम भाव के स्वामी का सप्तम भाव में फल जानने के लिए हमें नवम भाव की स्थिति पर गौर करना चाहिए। यदि नवम भाव का स्वामी सप्तम भाव में पीड़ित हो तब यह कुंडली के मारक प्रभाव में वृद्धि करता है। परंतु यदि नवम भाव का स्वामी सप्तम भाव में शुभ स्थिति में हो तब यह जातक की कुंडली के मारक प्रभाव को कम करता है।

6) नवम भाव प्रसिद्धि का कारक भाव होता है। सप्तम भाव जातक की सामाजिक स्थिति का कारक भाव होता है। यदि नवम भाव का स्वामी सप्तम भाव में स्थित हो तब जातक को उत्तम प्रसिद्धि की प्राप्ति होती है। जातक अपनी सोसाइटी नगर या राज्य में कुंडली की स्थिति और बलाबल के अनुसार प्रसिद्धि प्राप्त करता है। साथ ही यह भी संभव है कि जातक विदेशों में भी उत्तम सफलता और प्रसिद्धि प्राप्त करें।

7) सप्तम भाव जातक के दूसरों के प्रति व्यवहार से संबंधित होता है। यदि नवम भाव का स्वामी सप्तम भाव में स्थित हो तब जातक धार्मिक विचारों वाला व्यक्ति होता है। जातक का सामाजिक आचरण उत्तम होता है। जातक आध्यात्मिक विचारों वाला होता है। यदि कुंडली में योग हो तब जातक वैराग्य का भी संभावना बनता है।

8) नवम भाव पिता से संबंधित होता है। सप्तम भाव नवम भाव से एकादश स्थान होता है। यदि नवम भाव का स्वामी सप्तम भाव में स्थित हो तब जातक के पिता धनी और समृद्ध व्यक्ति होते हैं। जातक धनी परिवार में जन्म लेता है। जातक के पिता की आर्थिक स्थिति जातक के जन्म के उपरांत अच्छी होती है। साथ ही नवमेश सप्तम भाव में स्थित हो तब यह जातक के पिता के स्वास्थ्य के लिए उत्तम नहीं माना जाता है। जातक के पिता जातक से दूर निवास कर सकते हैं। जातक और जातक के पिता के मध्य वैचारिक मतभेद हो सकते हैं।

9) नवम भाव उच्च शिक्षा से संबंधित होता है। सप्तम भाव शिक्षा से संबंधित होता है। यदि नवम भाव का स्वामी सप्तम भाव में स्थित हो तब जातक उच्च शिक्षा की प्राप्ति के लिए विदेश जा सकता है। जातक जन्म स्थान से दूर भी शिक्षा प्राप्ति को जा सकता है।

10) नवम भाव दशम भाव से भावत भावम स्थान होता है। यदि नवम भाव का स्वामी सप्तम भाव में स्थित हो तब जातक के व्यापार के लिए यह शुभ या भाग्यशाली स्थिति मानी जा सकती है। जातक अपने उद्यम में सफलता प्राप्त करता है। जातक अपने पार्टनरशिप बिजनेस में भी अच्छी सफलता प्राप्त करता है।

11)नवम भाव का स्वामी सप्तम भाव में सप्तम भाव के स्वामी के साथ स्थित हो तब यह राजयोग का निर्माण करता है। जातक धनी और समृद्ध होता है। जातक की सभी इच्छाएं पूर्ण होती है। जातक सांसारिक सुख सुविधाओं के साथ-साथ शारीरिक सुख का भी आनंद उठाता है। जातक की पत्नी धनी और समृद्ध परिवार से संबंध रखती है। जातक की पत्नी का समाजिक प्रतिष्ठा भी अच्छी होती है। जातक सरकार से सहायता प्राप्त करता है। जातक की समाज में उत्तम प्रसिद्धि होती है। जातक राजनीति में भी सफलता प्राप्त कर सकता है।

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