कुंडली के तृतीय भाव में षष्ठेश का प्रभाव

कुंडली के तृतीय भाव में षष्ठेश का प्रभाव 1)कुंडली के तृतीय भाव में षष्ठेश का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम तृतीय भाव और छठे भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। छठे भाव का स्वामी स्वयं के भाव से दशम भाव में स्थित है, अतः प्रथम भाव के स्वामी का दशम भाव में क्या फल होता है, हम इसके बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) तृतीय भाव खुद की क्षमता और साहस से संबंधित होता है। छठा भाव भय और शत्रु से संबंधित होता है। यदि किसी भी भाव का स्वामी स्वंय के भाव से […]

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कुंडली के तृतीय भाव में चतुर्थेश का प्रभाव

कुंडली के तृतीय भाव में चतुर्थेश का प्रभाव 1) कुंडली के तृतीय भाव में चतुर्थेश का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम चतुर्थ भाव और तृतीय भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। चतुर्थ भाव का स्वामी स्वयं के भाव से तृतीय स्थान में स्थित है, अतः प्रथम भाव के स्वामी का द्वादश भाव में क्या फल होगा हम इसके बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे। 2)चतुर्थ भाव का स्वामी स्वयं के भाव से द्वादश स्थान में स्थित है। अतः यह चतुर्थ भाव के नैसर्गिक कारक के लिए शुभ नहीं माना जा सकता है। 3) चतुर्थ भाव […]

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कुंडली के तृतीय भाव में तृतीयेश का प्रभाव

कुंडली के तृतीय भाव में तृतीयेश का प्रभाव 1)कुंडली के तृतीय भाव में तृतीयेश का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम तृतीय भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। क्योंकि तृतीय भाव का स्वामी तृतीय भाव में ही है अर्थात स्वयं के भाव में ही है, इसलिए हम प्रथम भाव के स्वामी का प्रथम भाव में क्या फल होता है, इस बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) तृतीय भाव शक्ति और क्षमता का भाव होता है। अतः तृतीय भाव में स्थित तृतीयेश जातक की शारीरिक और मानसिक क्षमता को बढ़ाता है। जातक बहुत बहादुर और शक्तिशाली […]

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कुंडली के तृतीय भाव में द्वितीयेश का प्रभाव

कुंडली के तृतीय भाव में द्वितीयेश का प्रभाव 1) कुंडली के द्वितीय भाव में तृतीय भाव में द्वितीयेश का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम द्वितीय भाव और तृतीय भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। जैसा कि हम देख रहे हैं कि द्वितीय भाव स्वयं से द्वितीय स्थान में है, अतः प्रथम भाव के स्वामी का द्वितीय भाव में क्या प्रभाव होता है इसकी भी जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए। 2) द्वितीय भाव का स्वामी तृतीय भाव में है अर्थात द्वितीय से द्वितीय भाव में, अतः भावत भावम सूत्र के अनुसार द्वितीय भाव के स्वामी अपने […]

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कुंडली के तृतीय भाव में लग्नेश का प्रभाव

कुंडली के तृतीय भाव में लग्नेश का प्रभाव 1)कुंडली के तृतीय भाव में लग्नेश का प्रभाव जानने से पहले हम प्रथम भाव और तृतीय भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) तृतीय भाव जातक की क्षमता और शक्ति का कारक होता है। अतः लग्नेश जब तृतीय भाव में स्थित हो तब जातक अपनी स्वयं की क्षमता पर जीवन में सफलता प्राप्त करता है। जातक कड़ी मेहनत करने वाला व्यक्ति होगा। जातक अपनी कड़ी मेहनत के दम पर जीवन में सफलता प्राप्त करेगा और शक्तिशाली व्यक्ति बनने में सक्षम होगा। 3) लग्नेश जब तृतीय भाव में स्थित […]

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कुंडली के तृतीय भाव में केतु का प्रभाव

कुंडली के तृतीय भाव में केतु का प्रभाव 1)कुंडली के तृतीय भाव में केतु का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम केतू और तृतीय भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) तृतीय भाव में स्थित केतु के कारण जातक बहादुर और निडर प्रवृत्ति का व्यक्ति होता है। जातक की शारीरिक और मानसिक क्षमता उत्तम होती है। तृतीय भाव में स्थित केतु के कारण जातक अपनी क्षमता को लेकर पैनिक करता है। जातक के नॉलेज में यदि अपनी कोई कमजोरी आ जाए, तो उसको लेकर वह डर का अनुभव करता है। 3) तृतीय भाव में स्थित केतु […]

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कुंडली के तृतीय भाव में राहु का प्रभाव

कुंडली के तृतीय भाव में राहु का प्रभाव 1) कुंडली के तृतीय भाव में राहु का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम राहु और तृतीय भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) तृतीय भाव जातक की क्षमता का कारक भाव होता है। राहु एंपलीफायर एजेंट के रूप में कार्य करता है। अतः तृतीय भाव में स्थित होकर राहु जातक को क्षमता को बहुत ज्यादा बढ़ा देता है। अतः जातक शेर के समान बहादुर व्यक्ति होगा। यदि तृतीय भाव में राहु पीड़ित हो तब जातक सिर्फ दिखावे के लिए बहादुर व्यक्ति होगा अर्थात जातक की अंदरूनी शक्ति […]

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तृतीय भाव में शनि का प्रभाव

तृतीय भाव में शनि का प्रभाव 1) कुंडली के तृतीय भाव में शनि का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम तृतीय भाव और शनि के नैसर्गिक कार्यक्रमों के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) ऐसी मान्यता है कि पापी ग्रह तृतीय भाव में उत्तम रिजल्ट देते हैं। शनि एक नैसर्गिक पापी ग्रह है, अतः हम कह सकते हैं कि तृतीय भाव में स्थित शनि शुभ फल देने में सक्षम है। जातक बहादुर निर्भीक और उत्तम शारीरिक शक्ति वाला व्यक्ति होगा। जातक की मानसिक क्षमता भी अच्छी होगी। जातक चतुर और निडर होगा। जातक दयालु प्रवृत्ति का व्यक्ति होगा। जातक लोगों […]

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कुंडली के तृतीय भाव में शुक्र का प्रभाव

कुंडली के तृतीय भाव में शुक्र का प्रभाव 1)कुंडली के तृतीय भाव में शुक्र का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम शुक्र और तृतीय भाव के कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2)तृतीय भाव को शारीरिक और मानसिक क्षमता, अनुज या छोटे भाई बहन, कम्युनिकेशन, छोटी यात्राएं इत्यादि का कारक माना गया है। शुक्र को स्त्री सुंदर का कला शारीरिक सुख इत्यादि का कारक माना गया है। 3)शुक्र एक स्त्री ग्रह है और तृतीय भाव शारीरिक और मानसिक क्षमता का कारक भाव है। अतः तृतीय भाव में स्थित शुक्र के कारण जातक की शारीरिक क्षमता कम होगी और वह […]

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कुंडली के तृतीय भाव में गुरु का प्रभाव

कुंडली के तृतीय भाव में गुरु का प्रभाव 1) कुंडली के तृतीय भाव में गुरु का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम तृतीय भाव और गुरु के कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) तृतीय भाव शुभ उपग्रह अच्छा नहीं माना जाता है। तृतीय भाव में गुरु अस्त माना गया है। गुरु मृदु स्वभाव और नरम आचरण का कारक ग्रह है। तृतीय भाव में स्थित गुरु जातक के साहस में कमी करता है। जातक अपमान का सामना कर सकता है। जातक दूषित विचारों वाला और पाप कर्मों में लिप्त हो सकता है। 3) तृतीय भाव में स्थित गुरु जातक […]

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