कुंडली के द्वादश भाव में पंचमेश का प्रभाव

कुंडली के द्वादश भाव में पंचमेश का प्रभाव 1)कुंडली के द्वादश भाव में पंचमेश का प्रभाव जानने से पहले हम द्वादश भाव और पंचम भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। पंचम भाव का स्वामी स्वयं के भाव से अष्टम स्थान में स्थित है, अतः हम प्रथम भाव के स्वामी का अष्टम भाव में क्या फल होता है, इसके बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) पंचम भाव महत्वपूर्ण धर्म त्रिकोण स्थान है। द्वादश भाव एक मोक्ष स्थान है। यदि पंचम भाव का स्वामी द्वादश भाव में स्थित हो तब जातक धार्मिक और आध्यात्मिक विचारधारा वाला व्यक्ति […]

» Read more

कुंडली के एकादश भाव में पंचमेश का प्रभाव

कुंडली के एकादश भाव में पंचमेश का प्रभाव 1) कुंडली के एकादश भाव में पंचमेश का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम एकादश भाव और पंचम भाव के नैसर्गिक कार्य के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। पंचम भाव का स्वामी स्वयं के भाव से सप्तम भाव में स्थित है अतः प्रथम भाव के स्वामी का सप्तम भाव में क्या फल होता है, हम इसके बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) पंचम भाव पिछले जन्म के पुण्य से संबंधित होता है। एकादश भाव इच्छा से संबंधित होता है। अतः जब पंचम भाव का स्वामी एकादश भाव में स्थित हो तब […]

» Read more

कुंडली के दशम भाव में पंचमेश का प्रभाव

कुंडली के दशम भाव में पंचमेश का प्रभाव 1) कुंडली के दशम भाव में पंचमेश का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम दशम भाव और पंचम भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। पंचम भाव का स्वामी स्वयं के भाव से छठे स्थान में स्थित है, अतः प्रथम भाव के स्वामी का छठे भाव में क्या फल होता है, हम इसके बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे। 2)पंचम भाव का स्वामी दशम भाव में बहुत ही शुभ माना जाता है, क्योंकि पंचम भाव यानी लक्ष्मी स्थान का संबंध दशम भाव यानी कि विष्णु स्थान से बनता है। 3) […]

» Read more

कुंडली के नवम भाव में पंचमेश का प्रभाव

कुंडली के नवम भाव में पंचमेश का प्रभाव 1) कुंडली के नवम भाव में पंचमेश का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम पंचम भाव और नवम भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। पंचम भाव का स्वामी स्वयं के भाव से पंचम भाव में स्थित है, अतः प्रथम भाव के स्वामी का पंचम भाव में क्या फल होता है, हम इसके बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) नवम भाव पंचम भाव का भावत भावम भाव है, साथ ही पंचम भाव नवम भाव का भावत भावम भाव है, अतः पंचम भाव का स्वामी नवम भाव में स्थित […]

» Read more

कुंडली के अष्टम भाव में पंचमेश का प्रभाव

कुंडली के अष्टम भाव में पंचमेश का प्रभाव 1) कुंडली के अष्टम भाव में पंचमेश का प्रभाव जानने के लिए हम सर्वप्रथम पंचम भाव और अष्टम भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। पंचम भाव का स्वामी स्वयं के भाव से चतुर्थ भाव में स्थित है, अतः प्रथम भाव के स्वामी का चतुर्थ भाव में क्या फल होता है, हम इसके बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) अष्टम भाव कुंडली का सबसे अशुभ भाव माना जाता है। अष्टम भाव कुंडली में वर्तमान जीवन के बुरे कर्मों को दर्शाता है। पंचम भाव कुंडली में पिछले जन्म के […]

» Read more

कुंडली के सप्तम भाव में पंचमेश का प्रभाव

कुंडली के सप्तम भाव में पंचमेश का प्रभाव 1)कुंडली के सप्तम भाव में शनि का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम पंचम भाव और सप्तम भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। पंचम भाव का स्वामी स्वयं के भाव से तृतीय स्थान में स्थित है, अतः प्रथम भाव के स्वामी का तृतीय भाव में क्या फल होता है, हम इसके बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) साधारणतः पंचम भाव का स्वामी सप्तम भाव में शुभ नहीं माना जाता है। काल पुरुष की कुंडली में सूर्य पंचमेश होकर सप्तम भाव में नीच का होता है। अतः हम कह […]

» Read more

कुंडली के षष्ठम भाव मे पंचमेश का प्रभाव

कुंडली के षष्ठम भाव मे पंचमेश का प्रभाव 1) कुंडली के षष्ठम भाव मे पंचमेश का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम षष्टम भाव और पंचम भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। पंचम भाव का स्वामी स्वयं के भाव से द्वितीय स्थान में स्थित है, अतः प्रथम भाव के स्वामी का द्वितीय भाव में क्या फल होता है, इसके बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) पंचम भाव का स्वामी छठे भाव में शुभ नहीं माना जाता है क्योंकि छठा भाव दु:स्थान होता है और पंचम भाव शुभ स्थान होता है। साथ ही ऐसा माना जाता […]

» Read more

कुंडली के पंचम भाव में पंचमेश का प्रभाव

कुंडली के पंचम भाव में पंचमेश का प्रभाव 1) कुंडली के पंचम भाव में पंचमेश का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम पंचम भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। पंचम भाव का स्वामी स्वयं के भाव से मैं स्थित है अतः पंचम अतः प्रथम भाव के स्वामी का प्रथम भाव में क्या फल होता है हम इसके बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) पंचम भाव संतान से संबंधित होता है। यदि पंचम भाव का स्वामी पंचम भाव में स्थित हो तब जातक को उत्तम संख्या में संतान सुख प्राप्त होता है। जातक के बच्चे संस्कारी […]

» Read more

कुंडली के चतुर्थ भाव में पंचमेश का प्रभाव

कुंडली के चतुर्थ भाव में पंचमेश का प्रभाव 1)कुंडली के चतुर्थ भाव में पंचमेश का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम चतुर्थ भाव और पंचम भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। पंचम भाव का स्वामी स्वयं के भाव से द्वादश भाव में स्थित है, अतः प्रथम भाव के स्वामी का द्वादश भाव में क्या फल होता है, हम इसके बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) पंचम भाव त्रिकोण भाव है और चतुर्थ भाव केंद्र भाव है। अतः पंचम भाव का स्वामी चतुर्थ भाव में स्थित हों तब यह शुभ माना जाता है, क्योंकि त्रिकोण का […]

» Read more

कुंडली के तृतीय भाव में पंचमेश का प्रभाव

कुंडली के तृतीय भाव में पंचमेश का प्रभाव 1)कुंडली के तृतीय भाव में पंचमेश का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम तृतीय भाव और पंचम भाव के नैसर्गिक कार्य के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। पंचम भाव का स्वामी स्वयं के भाव से एकादश स्थान में स्थित है, अतः प्रथम भाव के स्वामी का एकादश भाव में क्या फल होता है, हम इसके बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) पंचम भाव और तृतीय भाव एक दूसरे से त्रि एकादश संबंध स्थापित करते हैं, जो एक उत्तम संबंध माना जाता है। अतः पंचम भाव का स्वामी तृतीय भाव में शुभ […]

» Read more
1 2