कुंडली के अष्टम भाव में षष्ठेश का प्रभाव

कुंडली के अष्टम भाव में षष्ठेश का प्रभाव 1) कुंडली के अष्टम भाव में षष्ठेश का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम अष्टम भाव और छठे भाव का नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। छठा भाव का स्वामी स्वयं के भाव से तृतीय स्थान में स्थित है, अतः प्रथम भाव के स्वामी का तृतीय भाव में क्या फल होता है, हम इसके बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे। 2)छठा भाव रोग से संबंधित होता है। अष्टम भाव लाइलाज बीमारी से संबंधित होता है। यदि छठा भाव का स्वामी अष्टम भाव में स्थित हो तब जातक लाइलाज बीमारी से […]

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कुंडली के अष्टम भाव में पंचमेश का प्रभाव

कुंडली के अष्टम भाव में पंचमेश का प्रभाव 1) कुंडली के अष्टम भाव में पंचमेश का प्रभाव जानने के लिए हम सर्वप्रथम पंचम भाव और अष्टम भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। पंचम भाव का स्वामी स्वयं के भाव से चतुर्थ भाव में स्थित है, अतः प्रथम भाव के स्वामी का चतुर्थ भाव में क्या फल होता है, हम इसके बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) अष्टम भाव कुंडली का सबसे अशुभ भाव माना जाता है। अष्टम भाव कुंडली में वर्तमान जीवन के बुरे कर्मों को दर्शाता है। पंचम भाव कुंडली में पिछले जन्म के […]

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कुंडली के अष्टम भाव में चतुर्थेश का प्रभाव

कुंडली के अष्टम भाव में चतुर्थेश का प्रभाव 1)कुंडली के अष्टम भाव में चतुर्थेश का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम चतुर्थ भाव और अष्टम भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। चतुर्थ भाव का स्वामी स्वयं के भाव से पंचम स्थान में स्थित है, अतः प्रथम भाव के स्वामी का पंचम भाव में क्या फल होता है, हम इसके बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) चतुर्थ भाव सुख का कारक होता है। अष्टम भाव मृत्यु का कारक होता है। यदि चतुर्थ भाव का स्वामी अष्टम भाव में स्थित हो तब यह जातक के लिए शुभ […]

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कुंडली के अष्टम भाव में तृतीयेश का प्रभाव

कुंडली के अष्टम भाव में तृतीयेश का प्रभाव 1) कुंडली के अष्टम भाव में तृतीयेश का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम अष्टम भाव और तृतीय भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। तृतीय भाव का स्वामी स्वयं के भाव से छठे स्थान में है, अतः प्रथम भाव के स्वामी का छठे भाव में क्या फल होता है, हम इसके बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) तृतीय भाव और अष्टम भाव एक दूसरे से षडाष्टक हैं। तृतीय भाव का स्वामी अष्टम भाव में शुभ नहीं माना जा सकता है। यह बहुत सारे नकारात्मक प्रभाव देने में […]

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कुंडली के अष्टम भाव में लग्नेश का प्रभाव

कुंडली के अष्टम भाव में लग्नेश का प्रभाव 1)कुंडली के अष्टम भाव में लग्नेश का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम प्रथम भाव और अष्टम भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) अष्टम भाव आयु का कारक भाव है। यदि लग्नेश जो कि जातक के प्राणों का कारक है अष्टम भाव में स्थित हो तो इसका अर्थ है कि यह जातक के आयु पर सीधा प्रभाव डालेगा। यदि लग्नेश अष्टम भाव में स्थित हो तब जातक दीर्घायु होगा। यदि लग्नेश अष्टम भाव में पीड़ित हो तब जातक अल्पायु या मध्यम आयु का व्यक्ति हो सकता है। […]

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कुंडली के अष्टम भाव में केतु का प्रभाव

कुंडली के अष्टम भाव में केतु का प्रभाव 1) कुंडली के अष्टम भाव में केतु का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम केतु और अष्टम भाव का नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) अष्टम भाव में केतु के कारण जातक की आयु पर बुरा प्रभाव पड़ता है। यदि केतु बुरी तरह पीड़ित हो तब जातक अल्पायु हो सकता है। लेकिन केतु शुभ स्थिति में हो और शुभ ग्रह से दृष्ट हो तो जातक लंबी आयु का होता है। 3)अष्टम भाव लाइलाज या लंबी अवधि के बीमारी कारण होता है। अष्टम भाव में स्थित केतु जातक को लंबी […]

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कुंडली के अष्टम भाव में राहु का प्रभाव

कुंडली के अष्टम भाव में राहु का प्रभाव 1) कुंडली के अष्टम भाव में राहु का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम राहु और अष्टम भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) अष्टम भाव आयुष भाव होता है। अष्टम भाव में स्थित राहु जातक को अल्पायु बना सकता है, लेकिन ऐसा हर कुंडली में नहीं होगा। अष्टम भाव में स्थित राहु अस्वाभिवक मृत्यु का कारण हो सकता है। अष्टम भाव में स्थित राहु के कारण विष या सांप के काटने से मृत्यु हो सकती है। अष्टम भाव में स्थित राहु पर यदि शुभ ग्रह के प्रभाव […]

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कुंडली के अष्टम भाव में शनि का प्रभाव

कुंडली के अष्टम भाव में शनि का प्रभाव 1)कुंडली के अष्टम भाव में शनि का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम अष्टम भाव और शनि के कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) अष्टम भाव को आयु स्थान माना जाता है और शनि आयु का कारक ग्रह है। अष्टम भाव में स्थित शनि जातक को दीर्घायु बनाता है, लेकिन अष्टम भाव में स्थित शनि जातक को लंबी चलने वाली बीमारी भी देता है। अष्टम भाव में स्थित शनि यदि उत्तम स्थिति में हो तब बुरे प्रभाव कम होते हैं। 3) अष्टम भाव में स्थित शनि जातक को पाइल्स की […]

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कुंडली के अष्टम भाव में शुक्र का प्रभाव

कुंडली के अष्टम भाव में शुक्र का प्रभाव 1)कुंडली के अष्टम भाव में शुक्र का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम अष्टम भाव और शुक्र के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) अष्टम भाव में शुक्र को शुभ माना जाता है, क्योंकि अष्टम भाव में स्थित शुक्र उत्तम फल देता है। जातक दीर्घायु हो सकता है। जातक धनी होगा और लग्जरियस लाइफ स्टाइल का जीवन व्यतीत करेगा। अगर हम बात करें तो ऐसा कर सकते हैं कि जातक एक राजा के समान जीवन व्यतीत करेगा। 3) अष्टम भाव में स्थित शुक्र जातक को यात्रा प्रिय बनाता है। […]

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कुंडली के अष्टम भाव में गुरु का प्रभाव

कुंडली के अष्टम भाव में गुरु का प्रभाव 1)कुंडली के अष्टम भाव में गुरु का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम गुरु और अष्टम भाव के कारक के संबंध में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) अष्टम भाव आयु से संबंधित भाव होता है और गुरु अष्टम भाव में स्थित होकर जातक को दीर्घायु बनाता है। जातक कफ से संबंधित समस्या का सामना कर सकता है। 3) गुरु को विद्या का कारक ग्रह माना जाता है, अष्टम भाव सीक्रेट या छिपी हुई या गूढ़ रहस्य से संबंधित विद्या से रिलेटेड होता है। अतः अष्टम भाव में स्थित गुरु जातक को ज्योतिष या […]

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