कुंडली के प्रथम भाव में षष्ठेश का प्रभाव

कुंडली के प्रथम भाव में षष्ठेश का प्रभाव 1) कुंडली के प्रथम भाव में षष्ठेश का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम छठे भाव और प्रथम भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। छठा भाव का स्वामी स्वयं के भाव से अष्टम भाव में स्थित है, अतः प्रथम भाव के स्वामी का अष्टम भाव में क्या फल होता है, हम इसके बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) छठा भाव दु:स्थान होता है। प्रथम भाव लग्न स्थान होता है और बहुत ही शुभ भाव माना जाता है। अतः छठे भाव के स्वामी का प्रथम भाव में स्थित […]

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कुंडली के प्रथम भाव में पंचमेश का प्रभाव

कुंडली के प्रथम भाव में पंचमेश का प्रभाव 1) कुंडली के प्रथम भाव में पंचमेश का प्रभाव जानने से पहले सर्वप्रथम हम प्रथम भाव और पंचम भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। पंचम भाव का स्वामी स्वयं के भाव से नवम स्थान में स्थित है, अतः प्रथम भाव के स्वामी का नवम भाव में क्या फल होता है, हम इसके बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे। 2)पंचम भाव पिछले जन्म के पुण्य कर्मों से संबंधित होता है। प्रथम भाव जातक के वर्तमान जन्म से संबंधित होता है। यदि पंचम भाव का स्वामी प्रथम भाव में स्थित […]

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कुंडली के प्रथम भाव में चतुर्थेश का प्रभाव

कुंडली के प्रथम भाव में चतुर्थेश का प्रभाव 1)कुंडली के प्रथम भाव में चतुर्थेश का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम प्रथम भाव और चतुर्थ भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। चतुर्थ भाव का स्वामी स्वयं के भाव से दशम स्थान में स्थित है, अतः प्रथम भाव के स्वामी का दशम भाव में क्या फल होता है, हम इसके बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) चतुर्थ भाव सुख का कारक भाव है, प्रथम भाव जातक से संबंधित होते हैं। प्रथम भाव में स्थित चतुर्थेश जातक को सभी प्रकार की सुख-सुविधा के साधन उपलब्ध कराता है, […]

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कुंडली के प्रथम भाव में द्वितीयेश का प्रभाव

कुंडली के प्रथम भाव में द्वितीयेश का प्रभाव 1)कुंडली के प्रथम भाव में द्वितीयेश का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम प्रथम भाव और द्वितीय भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। द्वितीयेश प्रथम भाव में स्थित होकर द्वी – द्वादश संबंध का निर्माण करता है, अर्थात द्वितीय अपने भाव से बारहवें भाव में स्थित है। अतः प्रथम भाव का स्वामी जब द्वादश भाव में होता है तब इसका प्रभाव क्या होता है, इसके बारे में भी हमें जानकारी प्राप्त करनी चाहिए। 2) द्वितीय भाव धन से संबंधित होता है, जब द्वितीय भाव का स्वामी लग्न में […]

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कुंडली के प्रथम भाव में केतु का प्रभाव

कुंडली के प्रथम भाव में केतु का प्रभाव 1)कुंडली के प्रथम भाव में केतु का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम प्रथम भाव और केतु के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) प्रथम भाव में स्थित केतु के कारण जातक लंबे कद के व्यक्ति होता है। जातक साफ-सुथरे रंग का व्यक्ति होता है। जातक शारीरिक रूप से कमजोर और दुबला पतला हो सकता है। प्रथम भाव में केतु के कारण जातक शरीर पर या चेहरे पर कट के निशान हो सकते हैं या जातक के किसी भी प्रकार का अंग भंग की संभावना होती है। 3) केतु […]

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कुंडली के प्रथम भाव में राहु का प्रभाव

कुंडली के प्रथम भाव में राहु का प्रभाव 1)कुंडली के प्रथम भाव में राहु का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम राहु और प्रथम भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) प्रथम भाव में स्थित राहु जातक के शारीरिक बनावट, स्वास्थ्य, मस्तिष्क, स्वभाव और आचार विचार पर गहरा प्रभाव डालता है। जैसा कि हम जानते हैं कि राहु एक छाया ग्रह है, अतः राहु की वास्तविक आकृति किसी भी पौराणिक ग्रंथ में नहीं दी गई है। राहु को धुंया के समान धुंधला कलर वाला और शनि के समान बताया गया है। साथ ही यह माना जाता […]

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कुंडली के प्रथम भाव में शुक्र का प्रभाव

कुंडली के प्रथम भाव में शुक्र का प्रभाव 1)कुंडली के प्रथम भाव में शुक्र के प्रभाव को जानने के लिए सर्वप्रथम हम प्रथम भाव और शुक्र के कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) प्रथम भाव में स्थित शुक्र जातक को मध्यम कद के कारण हो सकता है। जातक आकर्षक व्यक्तित्व वाला और सुंदर चेहरे और नाक नक्श वाला व्यक्ति होगा। जातक की आंखों में एक मनमोहक आकर्षण होगा। जातक अपनी वास्तविक उम्र से कम उम्र का दिखेगा। जातक का शारीरिक कद काठी आकर्षक होगा। 3) प्रथम भाव में स्थित शुक्र के कारण जातक आकर्षक व्यक्तित्व का होता है […]

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कुंडली के प्रथम भाव में गुरु का प्रभाव

कुंडली के प्रथम भाव में गुरु का प्रभाव 1)कुंडली के प्रथम भाव में गुरु का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम गुरु और प्रथम भाव के कारक के विषय में अध्ययन करेंगे। 2) प्रथम भाव में गुरु जातक को लंबे कद का, साफ सुथरा रंग का तथा आकर्षक व्यक्तित्व का मालिक बनाता है। जातक उत्तम स्वास्थ्य वाला तथा हेल्थी शरीर वाला व्यक्ति होगा। उसके चेहरे पर उसकी सत्य निष्ठा और विश्वास की झलक होगी। ‌ 3) प्रथम भाव में स्थित गुरु को महान ज्योतिष पवित्र गंगा जल की तरह मानते हैं। जिस प्रकार गंगाजल में सभी प्रकार के पापों का […]

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कुंडली के प्रथम भाव में बुध का प्रभाव

कुंडली के प्रथम भाव में बुध का प्रभाव 1) कुंडली के प्रथम भाव में बुध का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम प्रथम भाव और बुध के कारक के विषय में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) प्रथम भाव में स्थित बुध जातक को सुंदर और आकर्षक व्यक्तित्व का स्वामी बनाता है। जातक के त्वचा पर नैसर्गिक चमक होगी। जातक मध्यम कद का व्यक्ति हो सकता है। जातक अपनी से कम उम्र का व्यक्ति प्रतीत होगा । बुध को ग्रहों में युवराज की उपाधि प्राप्त है, अतः जातक प्रिंस के समान व्यक्तित्व वाला हो सकता है। जातक परफेक्ट बॉडी शारीरिक बनावट वाला […]

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कुंडली के प्रथम भाव में मंगल का प्रभाव

कुंडली के प्रथम भाव में मंगल का प्रभाव 1)कुंडली के प्रथम भाव में मंगल का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम मंगल और प्रथम भाव के कार्य के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) मंगल एक शुष्क ग्रह है अतः प्रथम भाव में अवस्थित मंगल जातक को दुबला पतला शारीरिक बनावट बाला बनाता है, लेकिन आदमी दुबला पतला होता हुआ अभी शारीरिक संरचना कसरती बॉडी के समान होगी। 3) प्रथम भाव में अवस्थित मंगल जातक को उत्तम शारीरिक क्षमता देता है। जातक साफ सुथरा और रक्त के समान लालिमा युक्त रूप वाला व्यक्ति बनाता है जातक देखने में आकर्षक और […]

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