कुंडली के चतुर्थ भाव में षष्ठेश का प्रभाव

कुंडली के चतुर्थ भाव में षष्ठेश का प्रभाव 1)कुंडली के चतुर्थ भाव में षष्ठेश का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम चतुर्थ भाव और छठे भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। छठे भाव का स्वामी स्वयं के भाव से एकादश स्थान में स्थित है, अतः प्रथम भाव के स्वामी का एकादश भाव में क्या फल होता है, हम इसके बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) चतुर्थ भाव छठे भाव से एकादश स्थान है, यानी चतुर्थ भाव छठे भाव के लिए लाभ स्थान है। यदि छठे भाव का स्वामी चतुर्थ भाव में स्थित हो तब छठे […]

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कुंडली के चतुर्थ भाव में पंचमेश का प्रभाव

कुंडली के चतुर्थ भाव में पंचमेश का प्रभाव 1)कुंडली के चतुर्थ भाव में पंचमेश का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम चतुर्थ भाव और पंचम भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। पंचम भाव का स्वामी स्वयं के भाव से द्वादश भाव में स्थित है, अतः प्रथम भाव के स्वामी का द्वादश भाव में क्या फल होता है, हम इसके बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) पंचम भाव त्रिकोण भाव है और चतुर्थ भाव केंद्र भाव है। अतः पंचम भाव का स्वामी चतुर्थ भाव में स्थित हों तब यह शुभ माना जाता है, क्योंकि त्रिकोण का […]

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कुंडली के एकादश भाव में चतुर्थेश का प्रभाव

कुंडली के एकादश भाव में चतुर्थेश का प्रभाव 1) कुंडली के एकादश भाव में चतुर्थेश का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम चतुर्थ भाव और एकादश भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। चतुर्थ भाव का स्वामी स्वयं के भाव से अष्टम भाव में स्थित है, अतः प्रथम भाव के स्वामी का अष्टम भाव में क्या फल होता है, हम इसके बारे में भी जानकारी प्राप्त करना चाहेंगे। 2)चतुर्थ भाव सुख का कारक भाव है। एकादश भाव इच्छाओं का कारक भाव है। यदि चतुर्थ भाव का स्वामी एकादश भाव में स्थित हो, तब जातक को सभी प्रकार […]

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कुंडली के चतुर्थ भाव में चतुर्थेश का प्रभाव

कुंडली के चतुर्थ भाव में चतुर्थेश का प्रभाव 1)कुंडली के चतुर्थ भाव में चतुर्थेश का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम चतुर्थ भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। चतुर्थ भाव का स्वामी स्वयं के भाव में स्थित है, अतः प्रथम भाव के स्वामी का प्रथम भाव में क्या फल होता है, हम इसके बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) चतुर्थ भाव का स्वामी चतुर्थ भाव में स्थित है, अतः चतुर्थ भाव के नैसर्गिक कारकों में वृद्धि संभावित होती है। चतुर्थ भाव सुख का कारक होता है, हम कर सकते हैं कि जातक को उत्तम सुख […]

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कुंडली के चतुर्थ भाव में तृतीयेश का प्रभाव

कुंडली के चतुर्थ भाव में तृतीयेश का प्रभाव 1) कुंडली के चतुर्थ भाव में तृतीयेश का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम चतुर्थ भाव और तृतीय भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। तृतीय भाव का स्वामी स्वयं के भाव से द्वितीय स्थान में स्थित है। अतः हम प्रथम भाव के स्वामी का द्वितीय भाव में क्या फल होता है, इसकी भी जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) चतुर्थ भाव सुख का भाव होता है। जब तृतीय भाव का स्वामी चतुर्थ भाव में स्थित हो तब हम कह सकते हैं कि जातक स्वंय की मेहनत के बदौलत सुख-सुविधा के […]

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कुंडली के चतुर्थ भाव में द्वितीयेश का प्रभाव

कुंडली के चतुर्थ भाव में द्वितीयेश का प्रभाव 1) कुंडली के चतुर्थ भाव में द्वितीयेश का प्रभाव जानने से पहले हम चतुर्थ भाव और द्वितीय भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। जैसा कि हम देख रहे हैं कि द्वितीय भाव का स्वामी स्वयं के भाव से तृतीय स्थान में स्थित है, अतः प्रथम भाव के स्वामी का तृतीय भाव में क्या फल होता है हमें इसके बारे में भी जानकारी प्राप्त करनी चाहिए। 2) चतुर्थ भाव सुख का कारक भाव होता है। यदि धन के भाव का स्वामी सुख के भाव में स्थित हो तब निश्चित […]

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कुंडली के चतुर्थ भाव में लग्नेश का प्रभाव

कुंडली के चतुर्थ भाव में लग्नेश का प्रभाव 1)कुंडली के चतुर्थ भाव में लग्नेश का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम प्रथम भाव और चतुर्थ भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2)चतुर्थ भाव जातक के सुख का कारक भाव होता है। जब लग्नेश चतुर्थ भाव में स्थित हो तब जातक को सारी प्रकार की सुख सुविधाएं प्राप्त होती है। जातक सांसारिक सुख के मामले में भाग्यशाली होता है। लग्नेश चतुर्थ भाव में स्थित होने के कारण जातक सारे प्रकार की सुख सुविधा अपने मेहनत के बदौलत हासिल हासिल करता है। जातक के पास उत्तम घर, उत्तम […]

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कुंडली के चतुर्थ भाव में केतु का प्रभाव

कुंडली के चतुर्थ भाव में केतु का प्रभाव 1) कुंडली के चतुर्थ भाव में केतु का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम केतु और चतुर्थ भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) चतुर्थ भाव माता का कारक भाव होता है और केतु एक पाप ग्रह है। अतः साधारण रूप से हम कह सकते हैं कि चतुर्थ भाव में स्थित केतु माता के लिए शुभ नहीं होता है। जातक और उसकी माता के बीच मतभेद या वैचारिक भिन्नता हो सकती है। जातक अपनी माता से अलगाव का सामना कर सकता है। जातक अपनी माता से दूर देश […]

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कुंडली के चतुर्थ भाव में राहु का प्रभाव

कुंडली के चतुर्थ भाव में राहु का प्रभाव 1)कुंडली के चतुर्थ भाव में राहु का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम चतुर्थ भाव और राहु के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2)सामान्य तथा चतुर्थ भाव में राहु को अशुभ माना जाता है, क्योंकि चतुर्थ भाव में स्थित राहु जातक के जीवन में बहुत सारी परेशानी खड़ी करती है। जातक के मन, शिक्षा, माता का सुख और बाल्यावस्था को भी प्रभावित करती है। 3) चतुर्थ भाव जातक के मन का कारक भाव होता है। अतः चतुर्थ भाव में स्थित राहु के कारण जातक अशांत मन का व्यक्ति होता […]

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कुंडली के चतुर्थ भाव में शनि का प्रभाव

कुंडली के चतुर्थ भाव में शनि का प्रभाव 1)कुंडली के चतुर्थ भाव में शनि का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम चतुर्थ भाव और शनि के कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) शनि नैसर्गिक रूप से पापी ग्रह है और चतुर्थ भाव में स्थित शनि अशुभ माना जाता है। अतः चतुर्थ भाव में स्थित शनि का अध्ययन बहुत ही गहराई के साथ करना चाहिए। उत्तम अवस्था में स्थित शनि अपने बुरे प्रभाव को कम करता है, परंतु पीड़ित और बुरी स्थिति में स्थित शनि जातक के जीवन को नर्क के समान बना सकता है। 3) चतुर्थ भाव माता […]

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