कुंडली के पंचम भाव में षष्ठेश का प्रभाव

कुंडली के पंचम भाव में षष्ठेश का प्रभाव 1)कुंडली के पंचम भाव में षष्ठेश का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम पंचम भाव और षष्टम भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। छठे भाव का स्वामी स्वयं के भाव से द्वादश भाव में स्थित है, अतः प्रथम भाव के स्वामी का द्वादश भाव में क्या फल होता है, हम इसके बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) छठे भाव का स्वामी पंचम भाव मे शुभ नहीं माना जाता है। जातक को अपने जीवन में विभिन्न प्रकार के परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जातक के अपने पिछले […]

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कुंडली के पंचम भाव में पंचमेश का प्रभाव

कुंडली के पंचम भाव में पंचमेश का प्रभाव 1) कुंडली के पंचम भाव में पंचमेश का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम पंचम भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। पंचम भाव का स्वामी स्वयं के भाव से मैं स्थित है अतः पंचम अतः प्रथम भाव के स्वामी का प्रथम भाव में क्या फल होता है हम इसके बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) पंचम भाव संतान से संबंधित होता है। यदि पंचम भाव का स्वामी पंचम भाव में स्थित हो तब जातक को उत्तम संख्या में संतान सुख प्राप्त होता है। जातक के बच्चे संस्कारी […]

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कुंडली के पंचम भाव में चतुर्थेश का प्रभाव

कुंडली के पंचम भाव में चतुर्थेश का प्रभाव 1)कुंडली के पंचम भाव में चतुर्थेश का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम पंचम भाव और चतुर्थ भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे।चतुर्थ भाव का स्वामी स्वयं के भाव से द्वितीय स्थान में स्थित है अतः हम प्रथम भाव के स्वामी का द्वितीय भाव में क्या फल होता है, इसके बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) चतुर्थ भाव का स्वामी पंचम भाव में शुभ माना जाता है। चतुर्थ भाव और पंचम भाव एक दूसरे से द्वि- द्वादश है, परंतु यहां पर द्वि-द्वादश संबंध होने पर भी अशुभ […]

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कुंडली के पंचम भाव में तृतीयेश का प्रभाव

कुंडली के पंचम भाव में तृतीयेश का प्रभाव 1)कुंडली के पंचम भाव में तृतीयेश का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम पंचम भाव और तृतीय भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। तृतीय भाव का स्वामी स्वयं के भाव से तृतीय भाव में स्थित है, अतः प्रथम भाव के स्वामी का तृतीय भाव में क्या फल होते हैं, हम इसके भी प्रभाव की जानकारी प्राप्त करेंगे। 2)तृतीय भाव का स्वामी स्वयं के भाव से तृतीय स्थान में स्थित है। भावत भावम सूत्र के अनुसार तृतीय भाव को नैसर्गिक बल प्राप्त होगा। अतः तृतीय भाव का स्वामी पंचम […]

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कुंडली के पंचम भाव में द्वितीयेश का प्रभाव

कुंडली के पंचम भाव में द्वितीयेश का प्रभाव 1) कुंडली के पंचम भाव में द्वितीय का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम पंचम भाव और द्वितीय भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) द्वितीय भाव धन से संबंधित होता है, पंचम भाव जातक के पिछले जन्म के पुण्य से संबंधित होता है। यदि द्वितीय भाव का स्वामी पंचम भाव में स्थित हो तब जातक धन के मामले में भाग्यशाली होता है। क्योंकि पिछले जन्म के पुण्य को कारण जातक को आसानी से धन से संबंधित कार्यों में सफलता प्राप्त हो जाती है। जातक अपने पैतृक संपत्ति […]

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कुंडली के पंचम भाव में लग्नेश का प्रभाव

कुंडली के पंचम भाव में लग्नेश का प्रभाव 1)कुंडली के पंचम भाव में लगने का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम प्रथम भाव और पंचम भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) लग्नेश पंचम भाव में शुभ माना जाता है। पंचम भाव जातक के पूर्व जन्म के पुण्य का कारक भाव होता है। यदि लग्नेश पंचम भाव में हो तब जातक के अपने पिछले जन्म के पुण्य के कारण जीवन में आसानी से सफलता प्राप्त होती है या हम कह सकते हैं कि जातक अपने पिछले जन्म के कर्मों के कारण इस जन्म में भाग्यशाली होता है। […]

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कुंडली के पंचम भाव में केतु का प्रभाव

कुंडली के पंचम भाव में केतु का प्रभाव 1)कुंडली के पंचम भाव में केतु का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम के हम केतू और पंचम भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) पंचम भाव में स्थित केतु संतान सुख के लिए शुभ नहीं माना जाता है। जातक को संतानोत्पत्ति में समस्या का सामना करना पड़ सकता है। जातक को संतान सुख विलंब से प्राप्त होने की संभावना बनती है। यदि पंचम भाव में स्थित केतु दूसरे नपुंसक ग्रहों से पीड़ित हो तब संतान की संभावना कम होती है। यह जातक के नि:संतान होने का भी योग […]

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कुंडली के पंचम भाव में राहु का प्रभाव

कुंडली के पंचम भाव में राहु का प्रभाव 1)कुंडली के पंचम भाव में राहु का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम पंचम भाव और राहु के नैसर्गिक कार्य के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) पंचम भाव संतान से संबंधित भाव होता है। राहु एक पापी ग्रह है, अतः पंचम भाव में पितृ दोष उत्पन्न करता है। शास्त्रों के अनुसार मेष राशि का, वृष राशि का, कर्क राशि के राहु के कारण पितृ दोष नहीं लगता है। पितृ दोष के कारण जातक को संतान उत्पत्ति में परेशानी का सामना करना पड़ता है। राहु यदि पंचम भाव में बहुत ज्यादा पीड़ित […]

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कुंडली के पंचम भाव में शनि का प्रभाव

कुंडली के पंचम भाव में शनि का प्रभाव 1)कुंडली के पंचम भाव में शनि का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम पंचम भाव और शनि के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) पंचम भाव को संतान से संबंधित भाव माना जाता है और शनि एक नैसर्गिक पापी ग्रह के रूप में पंचम भाव में पुत्र दोष का निर्माण करता है। यदि पंचम भाव स्थित शनि शुभ स्थिति में ना हो तब यह संतान के लिए उत्तम नहीं माना जाता है। जातक के संतान सुख में बाधा का कारण हो सकता है। यदि शनि पंचम भाव में अपने उच्च […]

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कुंडली के पंचम भाव में शुक्र का प्रभाव

कुंडली के पंचम भाव में शुक्र का प्रभाव 1)कुंडली के पंचम भाव में शुक्र का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम शुक्र और पंचम भाव के कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2)पंचम भाव को संतान से संबंधित भाव माना जाता है। अतः पंचम भाव में स्थित शुक्र एक नैसर्गिक शुभ ग्रह के कारण संतान के संदर्भ में शुभ रिजल्ट देने में सक्षम होता है। जातक को कई संतान होंगे। जातक के संतान देखने में सुंदर और आकर्षक होंगे। जैसा कि हम जानते हैं कि शुक्र एक स्त्री ग्रह है, अतः प्रथम संतान कन्या हो सकती है। दूसरा निष्कर्ष यह […]

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