ग्रहो की नीच राशी

1) सुर्य तुला राशी मे नीच के होते है। नीचतम डिग्री 10 डिग्री तुला राशि मे होेता है जो राहु द्वारा शासित स्वाति नक्षत्र (जिसके देवता वायु देव है)के अंतर्गत आता है । 2) चंद्रमा  वृश्चिक राशी मे नीच के होते है। नीचतम डिग्री 3डिग्री वृश्चिक राशी है। जो ​​बृहस्पति ग्रह के बल द्वारा शासित विशाखा नक्षत्र के अंतर्गत आता है जिसके देवता इंद्र है जोअग्नि का स्वामी है। 3) मंगल ग्रह कर्क राशी मे नीच के होते है। नीचतम डिग्री 28 डिग्री कर्क राशीहै जो अश्लेषा नक्षत्र के अंतर्गत आता है जो बुध के ग्रहबल द्वारा शासित है और […]

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ग्रहों की उच्च राशी

1)सूर्य मेष राशि मे उच्च के होते है और उच्चतम डिग्री 10 डिग्री है, जो अश्विनी नक्षत्र में होता है। 2)चंद्रमा वृष में राशि मे उच्च के होते है और उच्चतम डिग्री 3 डिग्री है जो कृतिका नक्षत्र में होता है। 3)मंगल मकर राशी में उच्च के होते है औंर उच्चतम डिग्री 28 डिग्री है, जो धनिष्ठा नक्षत्र में होता है। 4) बुध कन्या राशी में उच्च के होते है औंर उच्चतम डिग्री 15 डिग्री है जो हस्ता नक्षत्र में होता है। 5)बृहस्पति कैंसर(कर्क) राशि में उच्च के होते है और उच्चतम 5 डिग्री मे होता है जो पुष्य नक्षत्र मे […]

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केतु देव आध्यात्मिकता के कारक

केतु देव 1) स्थिति – असुर 2) दृष्टि – खुद की स्थिति से 5 वीं और 9 वीं भाव, और राशी दृष्टि 3) किसी भी राशि का स्वामी  नहीं  है। लेकिन वह खुद की दशा के दौरान भाव जहां बैठते  हैं, उस भाव के स्वामी की तरह व्यवहार करते हैं। 4) उच्च राशी – धनु राशि 5) मूल त्रिकोना राशि – मीन राशि  और  वृश्चिक अपना घर है। 6) मित्रता – मंगल ग्रह के समान है। लेकिन सूर्य और चंद्रमा केतु का शत्रु विचार है। 7) वश्य -बहुपद  प्राणी 8) वर्ण- मल्लेचछ 9) दिशा-दक्षिण पश्चिम 10) दूरी- कम दूरी( सात […]

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राहु देव कल्पना लोक के स्वामी

               राहु देव 1) स्थिति -असुर 2)राशी स्वामी- किसी भी राशि का स्वामी नही है।लेकिन वह खुद की दशा मे भाव स्वामी की तरह व्यवहार करता है। राहु को छद्म ग्रह माना जाता है। 3)दृष्टि – 5th और 9th भाव स्वयं से 4) उच्च राशी – वृष  राशि (या मिथुन राशी) 5) नीच राशी – वृश्चिक राशि( या धनु राशी), 6) मूलत्रिकोना राशी- कन्या राशी , अपना घर – कुम्भ राशी 7) मित्रता- शनि के समान क्याेंकि राहु शनि के समान व्यवहार करता है। राहु का मुख्य शत्रु चंद्रमा और सूर्य है । 8) दिवस -अमावस्या और शनिवार को 9 […]

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शनि देव दुर्भाग्य के स्वामी

           शनि देव 1) ग्रहो के राजदरबार मे स्थान – कर्मचारी, शनि  हमारे कर्मो का न्यायधिश हैं । 2) ऱाशीआधिपत्य -मकर  और कुंभ राशि 3)दृष्टि- स्वयं से  7वां औंर स्वयं से 3rd औंर 10th भाव 4) उच्च राशी – तुला (तुला) राशि तथा उच्चतम डिग्री 20 डिग्री 5) नीच राशी – मेष  राशि और नीचतम डिग्री 20 डिग्री 6) मूलत्रिकोना राशि 0 से 20 डिग्री तक कुंभ राशी में 7) तत्व – वायु तत्व 8) वर्ण (जाति) – शुद्र 9)वश्य – आकाश मे विचरण करने वाले जीव 10) श्रेणी – धातु (खनिज, अकार्बनिक पदार्थ) 11)नीति -भेद नीति 12) प्रकृति- स्वाभाविक […]

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शुक्र ग्रह कलियुगी धन के स्वामी

शुक्र 1) स्थिति – सलाहकार (आनंद और प्रमोद) 2) राशि स्वामी -वृष और तुला 3)दृष्टि – स्वयं से सातवे भाव पर 4) उच्च राशी – मीन राशी , उच्चतम डिग्री 27 डिग्री @मीन राशि 5) नीच राशी – कन्या राशी , नीचतम डिग्री  27 डिग्री @कन्या राशी 6) मूलत्रिकोना राशी – 0 से 15 डिग्री तक तुला राशी मे, तदुपरांत शुक्र का अपना घर 7) गुण -राजो गुण ग्रह है 8) प्रकृति -प्राकृतिक सौम्य ग्रह 9) तत्व – जलीय ग्रह 10)वर्ण- ब्राह्मण 11) वश्य -द्विपद (दो पैरों वाला प्राणी) 12) श्रेणी- वनस्पति, मूला 13) दिशा- दक्षिण पूर्व 14) दूरी – […]

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गगन के देवता बृहस्पति देव

बृहस्पति देव 1) राजदरबार मे स्थिति -मंत्री, धर्म गुरु, धर्माधिकारी, 2)राशि स्वामी – धनु और मीन राशि का 3) दृष्टि- विशेष दृष्टि के रूप में खुद की स्थिति से  5वॉ और 9वॉ  भाव तथा स्वयं से सप्तम भाव 4) उच्च राशी- बृहस्पति कर्क में उच्च का हाेता है।  उच्चतम डिग्री 5डिग्री है। 5) नीच राशी – बृहस्पति मकर राशी मे नीच के होते है। निचतम डिग्री 5 डिग्री है। 6) बृहस्पति की मूलत्रिकोना राशि 0 डिग्री से 10 डिग्री के बीच धनु राशी में होता है। उसके बाद अपना घर होता है। 7) बृहस्पति जीवित प्राणियों के रूप में जीव […]

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ग्रहो के युवराज बुध देव

बुध ग्रह 1) बुध ग्रह राजकुमार है। 2) राशि स्वामी – मिथुन और कन्या राशी 3) दृष्टि – 7th भाव पर 4)उच्च राशी  -कन्या राशी उच्चतम डिग्री @15 डिग्री कन्या राशी 5) नीच राशि –  मीन राशी, निचतम डिग्री 15डिग्री मीन राशी 6) बुध की मूलत्रिकोना राशि 16 से 20 डिग्री कन्या राशी है। मिथुन राशी और शेष कन्या राशी अपना राशी है। 7) बुध एक राजसिक (रजो) गुण वाला ग्रह है। 8) बुध वैश्य  जाति (वर्ण )के अंतर्गत आता है। 9) बुध एक भू तत्व प्रधान ग्रह है। 10) बुध जीव के अंतर्गत आता है (पशु / जीवित चीजों)। […]

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मंगल देव सभी ग्रह के सेनापति

मंगल ग्रह 1)ग्रह स्थिति– सेनापति 2) राशि स्वामी – मेष और वृश्चिक 3)दृष्टि – स्वयं से सप्तम भाव से और विशेष दृष्टि स्वयं से 4th और 8th भाव 4) उच्च राशी – मंगल ग्रह 28 डिग्री @ मकर में उच्चतम होता है। 5) नीच राशी – मंगल ग्रह 28 डिग्री @ कर्क राशी  में नीचतम होता है। 6) मूल त्रिकोना राशि – 0 से 12 डिग्री से मेष राशि में हाेता है। उसके बाद 30 डिग्री तक मेष राशी मे अपना राशी होता है। 7) मंगल ग्रह एक तामसिक (तमो गुण) ग्रह है। 8) मित्र ग्रह – सूर्य चंद्रमा बृहस्पति […]

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चंद्रमा ग्रहो की रानी

चंद्रमा (चंद्रमा) 1)स्थिति- ग्रहो की रानी 2)राशि -कर्क राशी का स्वामी 3)पूर्ण दृष्टि- स्वयं से सप्तम भाव 4) उच्च राशी – वृषभ राशी , उच्च डिग्री 3 डिग्री 5) नीच राशी- वृश्चिक राशी, निच डिग्री 3 डिग्री 6) मूल त्रिकोना राशि 3डिग्री के बाद वृषभ में 30डिग्री तक होता है। 7) स्वयं की राशि कर्क है। 8) मित्र ग्रह -सूर्य, बुध 9) तटस्थ ग्रह -शुक्र ,शनि ,मंगल ,बृहस्पति 10) कोई ग्रह चंद्रमा के लिए शत्रु नही है। 11) दिन सोमवार है 12) मौसम वर्षा मौसम 13) चंद्रमा जलीय ग्रह  है 14) चंद्रमा का गुण सतगुण है 15) चंद्रमा वैश्य वर्ण […]

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