पुनर्वसु नक्षत्र

पुनर्वसु नक्षत्र

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1) 7वीं नक्षत्र

2) अंग्रेजी नाम – Geminorium

3)नक्षत्र स्थिती – 20डिग्री मिथुन से  3 डिग्री 20 मिनट कर्क राशी

4)राशी स्वामी –  पुनर्वसु राशि के प्रथम तीन पद के राशी स्वामी बुध है और अंतिम पद के लिए राशि स्वामी चंद्रमा है ।

5) विशोंतरी दशा स्वामी – गुरु

6) नक्षत्र देवता – देवी अदिती है।

7) प्रतीक – धनुष और तीर के तरकश

8) वर्ण – वैश्य लेकिन कुण्डली मिलान मे मिथुन राशि में गिरने वाले प्रथम 3पद मिलान शूद्र और कर्क मे गिरने वाले अंतिम पद ब्राह्मण विचार किया जाता है।

9)वश्य -प्रथम 3पद मानव और अंतिम पद जलचर है।

10)स्वाभव – धैर्यवान

11)प्रवृति – चर

12)प्रकृति – सृष्टि

13)गुण – सात्विक (सत्तगुण)

14) गण – देव

15) योनि- मार्जर (कैट)

16)योनिवैर – मूषक

17) दिशा – बग़ल से

18)लिंग – पुरुष

19) नाडी- आदि

20) दोष – वात्त

21)तत्व – जलीय

22)रंग – ग्रे कलर या लेड कलर

23)वर्ण – के, को, हा, ही

24)सबसे विनाशकारी नक्षत्र  – भरणी

25)असहज नक्षत्र – माघा, पुर्वफाल्गुणी

26)सहज नक्षत्र – अश्लेषा नक्षत्र

27)विपत्त नक्षत्र – अश्लेषा, ज्येष्ठा , रेवती (बुध द्वारा शासित नक्षत्र)

28)प्रत्यारी नक्षत्र – पुर्वफाल्गुणी, पूर्वाषाढ़ा, भरणी (शुक्र द्वारा शासित नक्षत्र )

29)बाधा नक्षत्र  -हस्ता, श्रवणा, रोहणी (चंद्रमा द्वारा शासित नक्षत्र )

30) मित्र नक्षत्र -मंगल और राहु द्वारा शासित नक्षत्र -चित्रा, स्वाति,धनिष्ठा, शतभिषा, मृगशिरा, आद्रा

31) शारीरिक बनावट –  मध्यम कद , धीरज युक्त लुक, हैंडसम

32)व्यवहार –  बृहस्पति और जलीय तत्व दर्शाते है कि आध्यात्मिक, धार्मिक, ज्ञानवान, भौतिकवादी दृष्टिकोण का अभाव , अच्छे दिल वाले, सच्चाई, बड़प्पन, पवित्रता आदि
पुनर्वसु नाम का मतलब है फिर से बसना या पुणर्निर्माण और यह है कि सृष्टि नक्षत्र है जो  दर्शाता है कोई नकारात्मकता नहीं मतलब पूर्ण रुप से सकारात्मक (किसी भी कठिन परस्थिति में  हमेशा खुश रहने का स्वाभव), किसी भी चीज के पूणर्निमाण की क्षमता किसी भी स्तर पर ,किसी भी समय ,चंचल स्वभाव, चैलेंज को स्वीकार करने की क्षमता,

इसके अलावा वे अन्य को सहायता करते है , अंदरुऩी गुप्त प्रकृति की स्वाभव , बोलचाल मे निपुण

33) पेशा  – आध्यात्मिक शिक्षक, पुजारी, धार्मिक गतिविधि से संबंधित कोई भी काम, मनोवैज्ञानिक,रहस्यवादी, दार्शनिक (सभी गुरु के कारण)
पुन सृजन की शक्ति है अतः वास्तुकला, सिविल इंजीनियर, नए विचार, रखरखाव का काम, लेखन, वैज्ञानिकों
राशि स्वामी बुध और चंद्रमा है अतः -अभिनय, नाटक, आदि

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