कुंडली के प्रथम भाव मे शनि का प्रभाव

कुंडली के प्रथम भाव में शनि का प्रभाव

1) कुंडली के प्रथम भाव में शनि का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम प्रथम भाव और शनि के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे।


2) शनि एक नैसर्गिक पापी ग्रह है। प्रथम भाव में शनि का फलादेश करने के लिए सर्वप्रथम हमें कुंडली में शनि की स्थिति पर गौर करना चाहिए। प्रायः शनि किसी भी भाव में उत्तम नहीं माना जाता है क्योंकि यह जिस भाव में बैठेगा उस भाव के शुभ कारको का नाश करता है। शास्त्रों के अनुसार यदि शनि अपनी उच्च राशि में या अपने स्वयं की राशि में या अपने मूल त्रिकोण में हो, तब प्रथम भाव में स्थित शनि उत्तम माना जाता है और राजा के समान प्रसिद्धि देना वाला बोला गया है। अन्य राशि में शनि की स्थिति प्रथम भाव में शुभ नहीं मानी गई है। अन्य राशि में शनि जातक को गरीबी और कमजोर स्वास्थ्य देता है।


3) उपरोक्त कथन का तात्पर्य है कि, यदि कुंडली में शनि शुभ स्थिति में हो और तब जातक को धनी बनाता है, जातक को अच्छी सफलता और प्रसिद्धि दिलाता है । लेकिन यदि कुंडली में शनि शुभ स्थिति में ना हो तब जातक गरीबी और जीवन में कठिनाइयों का सामना करता है।


4) प्रथम भाव में स्थित शनि जातक को ऊंचे कद का, दुबला पतला और शुष्क शारीरिक बनावट देता है। जातक मध्यम रंग का होगा। जातक का स्वास्थ्य अच्छा नहीं होगा। जातक वात दोष से परेशान रह सकता है। जातक नकारात्मक विचारों के प्रभाव में रह सकता है और उसके मस्तिष्क में नकारात्मक विचारों का ही सृजन होता है।


5) प्रथम भाव में स्थित शनि जातक को नसों से संबंधित समस्या दे सकता है। जातक जोड़ों के दर्द से परेशान रह सकता है। जातक पैरालिसिस या नर्वस डिसऑर्डर का शिकार हो सकता है। जातक कोल्ड एंड कफ से संबंधित समस्या से पीड़ित रह सकता है। जातक के शरीर में जकड़न ऐंठन या दर्द से परेशानी हो सकती है।


6) शनि वायु प्रकृति का ग्रह है। अतः प्रथम भाव में स्थित शनि जातक को आसानी से दूसरों तक पहुंचने की कला में माहिर बना सकता है। अतः हम कह सकते हैं जातक किसी से संपर्क साधने में बेशर्म हो सकता है। जातक लेजी नेचर का हो सकता है। शनि भेद नीति का कारक है, अतः जातक डिवाइड एंड रूल वाली पॉलिसी से चलने में विश्वास रखता होगा या जातक दूसरों के बीच मतभेद पैदा करने में विश्वास रखता होगा। प्रथम भाव में स्थित शनि जातक को कठोर और क्रूर हृदय वाला व्यक्ति बना सकता है।


7) प्रथम भाव में स्थित शनि जातक को चंचल मस्तिष्क का व्यक्ति बनाता है। जातक किसी की मुद्दे पर बहुत गहराई से सोचने वाला व्यक्ति हो सकता है। जातक पौराणिक मान्यता को लेकर बहुत ही कठोर रुक रखता होगा और वह अपनी परंपरा को फॉलो करने में विश्वास रखता होगा। प्रथम भाव में स्थित शनि जातक को मेडिटेशन या ध्यान या दूसरे इसी प्रकार के कार्यों में सफलता दिलाता है। ध्यान से जातक का मस्तिष्क शांत रख सकता है।


8) प्रथम भाव में स्थित शनि जातक को लोअर ग्रेड के लोगों की सहायता करने के लिए प्रोत्साहित करता है। साथ ही प्रथम भाव में स्थित शनि जातक को कमजोर तबके के लोगों द्वारा सपोर्ट भी दिलाता है। प्रथम भाव में स्थित शनि जातक को अपने चाइल्ड या बचपन में या जीवन के प्रथम चरण में बहुत सारी परेशानी और स्ट्रगल देता है। यह परेशानी स्वास्थ्य से भी संबंधित हो सकती है, धन से भी हो सकती है या किसी दूसरी तरह की समस्या जैसे पारिवारिक समस्या भी हो सकती है। फाइनल डिसीजन व्यक्ति के कुंडली पर डिपेंड करेगा। प्रथम भाव में स्थित शनि जातक को बहुत ज्यादा कठिन परिश्रम से सफलता दिलाती है। यदि उत्तम अवस्था में हो तब जातक का सेल्फ कॉन्फिडेंस का लेवल आत्मविश्वास अच्छा होता है।

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