कुंडली के द्वादश भाव में द्वितीयेश का प्रभाव

कुंडली के द्वादश भाव में द्वितीयेश का प्रभाव

1)कुंडली के द्वादश भाव में द्वितीयेश का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम नाम द्वादश भाव और द्वितीय भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। द्वितीय भाव का स्वामी स्वयं के भाव से एकादश स्थान में स्थित है, अतः प्रथम भाव के स्वामी का एकादश भाव में क्या फल होता है हम इसके बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे।

2) द्वादश भाव व्यय स्थान होता है, द्वितीय भाव धन स्थान होता है। धन के भाव का स्वामी द्वादश भाव में अर्थात व्यय के भाव में स्थित हो तब यह संचित धन के व्यय की संभावना को बताता है।साथ ही द्वितीय भाव का स्वामी स्वयं के भाव से एकादश अर्थात लाभ स्थान में स्थित है अतः यह धन लाभ की भी संभावना देता है अतः व्यवहारिक रुप से द्वितीय भाव के स्वामी के द्वादश भाव में स्थिति के अनुसार फल की प्राप्ति होती है।साथ ही अगर हम बहुत ही साधारण रूप से भी विचार करें तब धन के व्यय के लिए भी धन होना जरूरी है। अतः हम कह सकते हैं कि द्वितीय भाव का स्वामी द्वादश भाव में स्थित हो तब जातक लग्जरियस लाइफ स्टाइल की ओर आकर्षित होता है। जातक अपनी सुख-सुविधा के साधन पर धन का व्यय करता है। यदि द्वितीय भाव का स्वामी द्वादश भाव में पीड़ित हो तब जातक के आमदनी से ज्यादा जातक के खर्चे होते हैं।

3) द्वादश भाव शयन सुख का कारक भाव है। यदि द्वितीय भाव का स्वामी द्वादश भाव में पीड़ित हो तब जातक शयन सुख प्राप्त करने के लिए अपने धन का खर्च करता है। जातक अपने धन को चरित्रहीन स्त्री के ऊपर खर्च कर सकता है।

4) द्वादश भाव अध्यात्म के गूढ़ रहस्य या मोक्ष से भी संबंधित होता है। यदि द्वितीय भाव का स्वामी द्वादश भाव में स्थित हो तब जातक अपने धन को आध्यात्मिक गतिविधियों, धार्मिक गतिविधियों धार्मिक यात्राएं या अन्य प्रकार के धार्मिक या आध्यात्मिक क्रियाकलापों के ऊपर व्यय कर सकता है या इन क्रियाकलापों में अपने धन का दान कर सकता है। साथ ही इसका एक अर्थ यह भी निकल सकता है कि जातक आध्यात्मिक गतिविधियों, धार्मिक स्थानों या आध्यात्मिक या धार्मिक संस्थाओं से धन अर्जित कर सकता है। द्वितीय भाव वाणी का भी कारक होता है अतः जातक एक अच्छा आध्यात्मिक वक्ता भी हो सकता है।

5) द्वादश भाव विदेश से संबंधित होता है। यदि द्वितीय भाव का स्वामी द्वादश भाव में स्थित हो तब जातक विदेश से संबंधित कार्यों से धन अर्जित कर सकता है। जातक धन अर्जित करने के लिए विदेश जा सकता है, या विदेशी वस्तु या संस्थाओं के माध्यम से धन अर्जित कर सकता है।

6) द्वितीय भाव का स्वामी द्वादश भाव में स्थित हो तब जातक सर्विस सेक्टर या जॉब से धन अर्जित करता है।

7) द्वादश भाव हॉस्पिटल से संबंधित होता है। अतः द्वादश भाव में स्थित द्वितीयेश जातक के धन को हॉस्पिटल पर खर्च कर आ सकता है। जैसे जातक के किसी फैमिली मेंबर का स्वास्थ्य खराब होने के कारण जातक के फैमिली मेंबर या स्वयं जातक को हॉस्पिटलाइज्ड होना पड़ सकता है, जिसके कारण जातक का संचित धन का व्यय संभावित होता है। इसके दूसरे अर्थ पर अगर हम विचार करें तो हम कह सकते हैं कि जातक हॉस्पिटल या मेडिकल लाइन से धन अर्जित कर सकता है।

8) द्वितीय भाव का स्वामी द्वादश भाव में स्थित हो तब जातक अनैतिक या गैर कानूनी कार्यों से धन अर्जित कर सकता है। जातक का धन अनैतिक या गैरकानूनी कार्यो के कारण व्यय हो सकते हैं।

9)द्वितीय भाव का स्वामी द्वादश भाव में स्थित हो तब जातक को नेत्र से संबंधित समस्या हो सकती है। जातक को अनिंद्रा से जुड़ी समस्या भी हो सकती है। जातक को मानसिक तनाव का भी अनुभव करना पड़ सकता है। ‌

10)द्वितीय भाव का स्वामी द्वादश भाव में स्थित हो तो जातक को अपने पिता का सुख नहीं प्राप्त होता है। अर्थात जातक अपने पिता से दूर रह सकता है या जातक और पिता के बीच अलगाव जैसी समस्या हो सकती है।

11) द्वितीय भाव मारक का स्थान होता है। द्वादश भाव दूः स्थान होता है। द्वितीय भाव का स्वामी द्वादश भाव में स्थित हो तब द्वितीयेश एक स्ट्रांग मारक हो सकता है। अतः जातक को स्वास्थ्य संबंधित समस्या दे सकता है या जातक को आयु के लिए खतरा साबित हो सकता है।

12)द्वितीय भाव का स्वामी द्वादश भाव में स्थित तब जातक को उत्तम नेम और फेम प्राप्त होता है।

13)द्वितीय भाव का स्वामी द्वादश भाव के स्वामी केक स्ट्रांग मारक भी साबित हो सकता है। जातक के खर्चे बहुत ज्यादा हो सकते हैं। जातक कर्ज में डूबा रह सकता है। जातक आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं साथ द्वादश भाव में स्थित हों तब यह धन के लिए अच्छा नहीं माना जा सकता है। साथ ही यह ए हो सकती है।

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