कुंडली के तृतीय भाव में पंचमेश का प्रभाव

कुंडली के तृतीय भाव में पंचमेश का प्रभाव

1)कुंडली के तृतीय भाव में पंचमेश का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम तृतीय भाव और पंचम भाव के नैसर्गिक कार्य के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। पंचम भाव का स्वामी स्वयं के भाव से एकादश स्थान में स्थित है, अतः प्रथम भाव के स्वामी का एकादश भाव में क्या फल होता है, हम इसके बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे।

2) पंचम भाव और तृतीय भाव एक दूसरे से त्रि एकादश संबंध स्थापित करते हैं, जो एक उत्तम संबंध माना जाता है। अतः पंचम भाव का स्वामी तृतीय भाव में शुभ माना जाएगा। साथ ही तृतीय भाव को दु:स्थान भी माना जाता है, अतः यदि हम इस आधार पर देखें तब पंचम भाव के स्वामी का तृतीय भाव में स्थित होना शुभ नहीं माना जाएगा। अतः पंचम भाव के स्वामी का तृतीय भाव में फल जानने के लिए हमें सर्वप्रथम पंचमेश की तृतीय तृतीय भाव में स्थिति को अच्छे से देखना होगा। यदि सुस्थित हो तब शुभ फल देगा, यदि पीड़ित हो तब नकारात्मक फल देगा।

3) तृतीय भाव उपचय भाव होता है। साथ ही तृतीय भाव स्वयं की मेहनत और क्षमता का भी कारक भाव होता है। पंचम भाव ज्ञान और सोच का कारक भाव होता है। यदि पंचम भाव का स्वामी तृतीय भाव में स्थित हो तब जातक उत्तम ज्ञान अपने स्वयं की मेहनत और क्षमता के बदौलत प्राप्त करता है। जातक की मानसिक क्षमता भी उत्तम होगा। तृतीय भाव का भावत भावम भाव पंचम भाव है, अतः पंचम के तृतीय में स्थित होने के कारण तृतीय भाव के नैसर्गिक गुणों में भी बढ़ोतरी होगी। अतः जातक शारीरिक और मानसिक रूप से बलशाली व्यक्ति होगा।

4) पंचम भाव संतान से संबंधित होता है। पंचम भाव का स्वामी स्वयं के भाव से एकादश भाव में स्थित है, पंचमेश तृतीय भाव में स्थित हो तब जातक के संतानों की संख्या उत्तम होती है। जातक के संतान जीवन में अच्छी सफलता प्राप्त करते हैं। जातक के संतान को प्रसिद्धि और संपन्नता होती हैं। जातक अपनी संतान का सुख प्राप्त करता है। यदि पंचम भाव का स्वामी तृतीय भाव में पीड़ित हो तब जातक की संतानों को समस्या हो सकती है। जातक के संतान को स्वास्थ्य से संबंधित समस्या हो सकती है।

5) तृतीय भाव छोटे भाई से संबंधित होता है। यदि पंचम भाव का स्वामी तृतीय भाव में स्थित हो तो जातक का भाई बहादुर और शारीरिक और मानसिक क्षमता से बलशाली होता है। जातक को भाई सुख प्राप्त होता है। जातक के भाइयों को समाज में अच्छी प्रसिद्धि प्राप्त होगी। जातक के भाई राजनीति में सक्रिय हो सकते हैं या डिप्लोमेट हो सकते हैं। यदि पंचम भाव का स्वामी तृतीय भाव मे शुभ स्थिति में हो तब जातक को अपने भाइयों से सहायता प्राप्त होती है और जातक अपनी भाइयों के सहायता से अच्छा धन अर्जित करता है। यदि पंचम भाव का स्वामी तृतीय भाव में पीड़ित हो तब, जातक को अपने भाइयों के कारण मानसिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है।

6)तृतीय भाव स्वयं की मेहनत से संबंधित होता है। पंचम भाव पिछले जन्म के पुण्य से संबंधित होता है। यदि पंचम भाव का स्वामी तृतीय भाव में स्थित हो तो जातक पिछले जन्म के पुण्य के कारण अपने जीवन में सफलता प्राप्त करता है। लेकिन उसके लिए जातक को स्वयं मेहनत भी करना पड़ता है। यानी जातक अपने मेहनत के बदौलत और पिछले जन्म के पुण्य के कारण जीवन में अच्छी तरक्की करता है।

7) पंचम भाव ज्ञान और विद्या से संबंधित होता है। तृतीय भाव यात्रा से संबंधित होता है। यदि पंचम भाव का स्वामी तृतीय भाव में स्थित हो, तब जातक को विद्या या ज्ञान अर्जित करने के लिए छोटी यात्राएं करनी पड़ती है या अपने मातृभूमि से दूर जाना पड़ सकता है।

8)यदि पंचम भाव का स्वामी तृतीय भाव में स्थित हो तब जातक धार्मिक होता है और जातक धार्मिक यात्रा के लिए अपनी मातृभूमि से दूर की यात्रा करता है।

9)यदि पंचम भाव का स्वामी तृतीय भाव के स्वामी के साथ तृतीय भाव में स्थित हो, तब जातक शारीरिक और मानसिक रूप से सक्षम होता है। जातक को अपने बच्चों का सुख प्राप्त होता है। जातक के छोटे भाई समाज में अच्छी प्रसिद्धि प्राप्त करते हैं। जातक के भाई राजनीतिक पार्टी के नेता हो सकते हैं। जातक में अच्छी शारीरिक और मानसिक क्षमता होती है।

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